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पश्चिम बंगाल HC जज के लाल परिधान पर छिड़ी बहस, लोग बोले- अंग्रेज गए, लेकिन...

ब्रिटेन की अदालतों में जज और वकीलों द्वारा पहनी जाने वाली सफेद विग की परंपरा 17वीं सदी से जुड़ी हुई है. Charles II के समय में विग पहनना समाज के अमीर वर्ग में फैशन बन गया था और बाद में यह अदालत के ड्रेस कोड का हिस्सा बन गया.

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शपथ दिलाते समय मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने लाल रंग का गाउन और विग पहन रखा था. ( Photo: IANS )
शपथ दिलाते समय मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने लाल रंग का गाउन और विग पहन रखा था. ( Photo: IANS )

पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल के रूप में आर. एन. रवि के शपथ ग्रहण समारोह ने सिर्फ राजनीतिक बदलाव की वजह से ही नहीं, बल्कि एक खास दृश्य की वजह से भी लोगों का ध्यान खींचा. कोलकाता के राज भवन में गुरुवार को आयोजित इस समारोह में सुजॉय पॉल ने आर. एन. रवि को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस मौके पर ममता बनर्जी भी मौजूद थीं. हालांकि समारोह के दौरान लोगों का ध्यान एक अलग चीज पर गया. दरअसल, शपथ दिलाते समय मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने लाल रंग का गाउन और ब्रिटिश दौर की शैली वाली अदालत की विग पहन रखी थी. यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया. लोग जज के लाल परिधान पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. चलिए जानते हैं.

बताया जा रहा है कि सुजॉय पॉल ने इसी तरह का गाउन और विग इस साल जनवरी में भी पहना था, जब उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी. उस समय उन्हें शपथ C. V. Ananda Bose ने दिलाई थी. यह परंपरा वहां पहले के कई जज भी निभाते आए हैं. दरअसल, अदालतों में विग पहनने की परंपरा 17वीं सदी की ब्रिटिश न्याय व्यवस्था से जुड़ी हुई है. भारत में आजकल शपथ ग्रहण समारोहों में इस तरह की विग बहुत कम देखने को मिलती है. इसलिए इस समारोह में इसका दिखना लोगों के लिए थोड़ा अलग और खास लगा. यही वजह है कि यह दृश्य सोशल मीडिया और खबरों में चर्चा का विषय बन गया और लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि कोलकाता हाईकोर्ट के कुछ जज आज भी उस दौर की तरह की पोशाक क्यों पहनते हैं.

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 17वीं सदी में शुरू हुई थी परंपरा
अगर आपने United Kingdom की अदालतों की तस्वीरें, टीवी शो या फिल्में देखी हों, तो आपने जरूर गौर किया होगा कि वहां कई जज और वकील सिर पर सफेद रंग की कर्ली विग यानी नकली बाल पहनते हैं. पहली नजर में यह परंपरा काफी अजीब और पुराने जमाने की लग सकती है. आज के आधुनिक दौर में जब लगभग हर पेशे में कपड़ों का स्टाइल बदल चुका है, तब अदालत में इस तरह की विग का इस्तेमाल लोगों को हैरान भी करता है. लेकिन असल में यह सिर्फ एक फैशन या दिखावे की चीज नहीं है. इसके पीछे कई सौ साल पुरानी परंपरा, इतिहास और न्याय व्यवस्था से जुड़ी खास सोच छिपी हुई है. 

 

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, 17वीं सदी में ब्रिटेन में अदालतों में विग पहनने की परंपरा शुरू हुई थी. उस समय Charles II के शासनकाल में विग पहनना समाज के अमीर और प्रभावशाली लोगों के बीच फैशन बन गया था. उस दौर में यूरोप में सिफलिस नाम की बीमारी फैल गई थी, जिससे कई लोगों के बाल झड़ने लगे थे. लोग अपने गंजेपन और बीमारी के असर को छुपाने के लिए घोड़े या इंसानी बालों से बनी विग पहनने लगे. धीरे-धीरे यह फैशन राजदरबार और उच्च समाज में आम हो गया. कुछ समय बाद जज और वकीलों ने भी अदालत में विग पहनना शुरू कर दिया.

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19वीं सदी तक यह अदालत की ड्रेस का हिस्सा
लगभग 1685 के आसपास ब्रिटेन की अदालतों में जज और वकीलों के विग पहनने के उदाहरण मिलने लगे. इसके बाद 19वीं सदी तक यह अदालत की ड्रेस का हिस्सा बन गया. 1840 के दशक में यह नियम लागू हो गया कि वकील बिना विग और गाउन के अदालत में बहस नहीं कर सकते. इतिहास में एक दिलचस्प घटना भी दर्ज है. एक बार एक वकील अदालत में बिना विग के पहुंच गए. तब जज ने कहा— “मुझे न तो मिस्टर बोडकिन दिखाई दे रहे हैं और न ही उनकी आवाज सुनाई दे रही है.” यानी विग न पहनने की वजह से उनकी बात ही नहीं सुनी गई.

वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार,  ब्रिटेन में आज भी कई पुरानी परंपराएं निभाई जाती हैं. जैसे कुछ सैनिक आज भी सिर पर लंबे बियर स्किन हैट पहनते हैं, जो Battle of Waterloo के समय से जुड़ी परंपरा मानी जाती है. इसी तरह वहां की अदालतों में भी जज और वकील खास तरह की सफेद विग पहनते हैं. यह परंपरा Charles II के शासनकाल (1660–1685) से चली आ रही है.

घोड़े के बालों से ऐसे बनता है बिग
अदालतों में पहनी जाने वाली इस विग को 'पेरुक' या 'पेरिविग' कहा जाता है. इसे आमतौर पर घोड़े के बालों से बनाया जाता है. सबसे पहले इन बालों को अच्छी तरह धोया जाता है, फिर रंग के अनुसार अलग किया जाता है और उसके बाद हाथ से एक खास कपड़े के आधार पर बुना जाता है. इस विग को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते हैं. इसलिए इसकी कीमत भी काफी ज्यादा होती है. एक अच्छी क्वालिटी की अदालत वाली विग की कीमत करीब 800 डॉलर (73,958.44 भारतीय रुपये) या उससे भी ज्यादा हो सकती है. ब्रिटेन में इस तरह की विग बनाने वाली सबसे पुरानी कंपनियों में से एक Ede & Ravenscroft है. यह कंपनी 1689 से जज और वकीलों के लिए विग बना रही है. इसके अलावा यह कंपनी राजपरिवार से जुड़े खास कपड़े और ताजपोशी (कोरोनेशन) के वस्त्र भी तैयार करती है.

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आज भी क्यों पहनते हैं वकील विग
आज भी ब्रिटेन की कई अदालतों में वकील विग पहनते हैं. इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं. सबसे बड़ा कारण यह है कि विग अदालत में औपचारिकता और परंपरा को बनाए रखती है. इसके अलावा यह वकील की व्यक्तिगत पहचान को थोड़ा छिपा देती है, जिससे ध्यान सिर्फ मामले और दलीलों पर रहता है, न कि व्यक्ति पर.

किन लोगों को पहननी पड़ती है विग
आमतौर पर अदालत में जज और बैरिस्टर (विशेष प्रकार के वकील) विग पहनते हैं, खासकर आपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान. हालांकि सभी जगह ऐसा जरूरी नहीं होता और कुछ जगहों पर यह नियम धीरे-धीरे कम भी हो गया है.

किन देशों में यह परंपरा है
अदालत में विग पहनने की परंपरा मुख्य रूप से उन देशों में देखने को मिलती है जिनकी न्याय प्रणाली ब्रिटेन की कॉमन लॉ प्रणाली से प्रभावित है. कई कॉमनवेल्थ देशों में आज भी जज और वकील विग पहनते हैं. इसके विपरीत, कई अन्य देशों में यह परंपरा नहीं है. उदाहरण के लिए यूरोप के कई देशों की सिविल लॉ प्रणाली में विग नहीं पहनी जाती. वहीं, United States में भी जज और वकील विग नहीं पहनते. वहां अदालत में जज आमतौर पर काले रंग का गाउन पहनते हैं, जो अदालत की गरिमा और अधिकार का प्रतीक माना जाता है.

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21वीं सदी में भी जारी है बहस
हालांकि आज के समय में इस परंपरा को लेकर बहस भी होती रहती है. कुछ लोगों का मानना है कि यह पुरानी और गैर-जरूरी परंपरा है. जबकि कुछ वकील कहते हैं कि यह ड्रेस कोड सभी को एक जैसा दिखाता है और उम्र, रंग या लिंग के आधार पर होने वाले पूर्वाग्रह को कम कर सकता है. कुछ आलोचकों का यह भी कहना है कि यह विग आधुनिक और विविध समाज के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है. खासकर ऐसे लोगों के लिए जिनके बालों की शैली अलग होती है, जैसे अफ्रो हेयरस्टाइल. हालांकि अब कई जगहों पर विग पहनना अनिवार्य नहीं रहा, फिर भी ब्रिटेन की अदालतों में यह परंपरा आज भी काफी हद तक जारी है और इसे न्यायिक व्यवस्था की पहचान माना जाता है.

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