28 अप्रैल 1945 को बेनिटो मुसोलिनी और उनकी पार्टनर क्लारा पेटाची को इतालवी विद्रोहियों ने गोली मार दी थी. दोनों को उस समय पकड़ लिया गया था जब वे स्विट्जरलैंड भागने की कोशिश कर रहे थे. पूर्व तानाशाह मुसोलिनी को युद्ध के अंत में जर्मन कब्जे के दौरान उत्तरी इटली में उनके कुछ समर्थकों और जर्मन सहयोगियों ने कठपुतली सरकार का मुखिया बना रखा था. अमेरिका और ब्रिटेन के हाथ में आने से बचने के लिए वह स्विट्जरलैंड भागना चाहते थे.
जैसे-जैसे मित्र राष्ट्र इतालवी प्रायद्वीप में आगे बढ़ते गए और धुरी शक्तियों की हार लगभग निश्चित हो गई. 61 साल के अपदस्थ पूर्व तानाशाह मुसोलिनी अपने विकल्पों पर विचार करने लगे.
वे न तो अंग्रेजों के हाथों में पड़ना चाहते थे और न ही अमेरिकियों के और यह जानते हुए कि उत्तर में इतालवी फासीवादी सैनिकों और गुंडों के बचे हुए गुटों से लड़ रहे कम्युनिस्ट पक्षकार उन्हें युद्ध अपराधी मानकर उन पर मुकदमा चलाएंगे, उन्होंने एक तटस्थ देश में भाग जाने का विकल्प चुना.
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वह अपनी प्रेमिका के साथ स्विस सीमा तक पहुंच गए, लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि उनके गार्ड दल-बदलुओं के पक्ष में चले गए हैं. यह जानते हुए कि वे उन्हें आगे नहीं जाने देंगे, उन्होंने लूफ़्टवाफे का कोट और हेलमेट पहन लिया और कुछ जर्मन सैनिकों के साथ ऑस्ट्रिया में घुसने की कोशिश की.
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उनकी यह चाल नाकाम रही और उन्हें तथा पेटाची को दल-बदलुओं ने पकड़ लिया और गोली मार दी. उनके शवों को ट्रक से मिलान ले जाया गया, जहां उन्हें उल्टा लटकाकर जनता के सामने अपमानित किया गया.