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मुगल राजकुमार मुराद के बारे में सुना है, जिसे उसके ही बड़े भाई औरंगजेब ने फांसी दे दी थी!

मुगल बादशाह और शहजादों से जुड़ी कई कहानियां इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं. इनमें से कई ऐसी है जिनके बारे में ज्यादा बातें नहीं होती हैं, लेकिन इनकी कहानियां कम रोचक नहीं है. ऐसे ही शख्सियत थे मुराद बख्श, जानते हैं इनकी कहानी क्या है?

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हर कदम पर साथ देने वाले भाई को भी औरंगजेब ने नहीं बख्शा (Representational Photo - Getty)
हर कदम पर साथ देने वाले भाई को भी औरंगजेब ने नहीं बख्शा (Representational Photo - Getty)

मुराद बख्श शाहजहां के सबसे छोटे बेटे और औरंगजेब के भाई थे. शाहजहां ने अपने सबसे बड़े बेटे दारा शिकोह को मुगल सिंहासन का उत्तराधिकारी घोषित किया था. इससे महत्वाकांक्षी औरंगजेब नाखुश हो गया. शाहजहां के गंभीर रूप से बीमार पड़ने पर उनके चार बेटों मुराद बख्श, शाह शुजा, औरंगजेब और दारा शिकोह के बीच उत्तराधिकार का संघर्ष शुरू हो गया. मुराद ने भाईयों के साथ विवाद में हमेशा औरंगजेब का साथ दिया. 

अपनी उत्कृष्ट सैन्य कुशलता के बल पर औरंगजेब ने जून 1658 में समुगढ़ में दारा शिकोह को पराजित किया और धीरे-धीरे उन्हें उत्तर-पश्चिमी भारत में भागने पर विवश कर दिया. इस पलायन के दौरान दारा शिकोह का अधिकार कमजोर होने लगा.

औरंगजेब की राजनीतिक रणनीतियों और दारा शिकोह के समर्थकों के बीच संदेह पैदा करने वाले जाली पत्रों ने उनकी सेना में संदेह और अविश्वास बढ़ा दिया. दारा के कई विश्वासपात्र उनसे अलग हो गए. दारा शिकोह पर इस्लाम से विमुख होने का आरोप लगाया गया और धार्मिक अधिकार के तहत उन पर मुकदमा चलाया गया. अगस्त 1659 में औरंगजेब के आदेश पर दारा शिकोह को फांसी दे दी गई. इन सारे काम में मुराद बख्श ने औरंगजेब का साथ दिया था. 

एक-एक दावेदारों को औरंगजेब ने रास्ते से हटा दिया
जब औरंगजेब ने शाहजहां के बाद सिंहासन पर अपना दावा किया और एक-एक कर सभी दावेदारों को रास्ते से हटा दिया. इस काम में औरंगजेब के छोटे भाई मुराद बख्श ने हर कदम पर उसका खूब साथ दिया था. लेकिन उसे पता नहीं था कि आने वाले भविष्य में उसके साथ क्या होने वाला है. 

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मुगल सिंहासन पर अपने दावे के रास्ते में आने वाली हर बाधा को दूर करने वाले औरंगजेब ने उसका साथ देने वाले भाई मुराद का भी बुरा हर्श्र किया.   1658 में, औरंगज़ेब ने अपने दो भाइयों को पहले ही परास्त कर मुगल सिंहासन पर कब्ज़ा कर लिया था. अब उसने अपनी सत्ता के लिए बचे हुए सभी खतरों को खत्म करने के लिए  कदम उठाए.

अपने मंत्री की हत्या का मुराद पर लगाया था आरोप
मुराद बख्श, जिसने दारा शिकोह के विरुद्ध औरंगज़ेब के अभियान में उनका साथ दिया था. औरंगजेब ने उसे भी गिरफ्तार कर ग्वालियर किले में कैद कर लिया. सिंहासन पर अपने अधिकार को सुरक्षित करने के लिए, औरंगजेब ने मुराद बख्श पर अपने मंत्री अली नकी की हत्या का आरोप लगाया. 

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मामले की सुनवाई हुई और मुराद बख्श को दोषी ठहराया गया. दिसंबर, 1661 को, वर्षों की कैद के बाद मुराद को ग्वालियर किले के भीतर फांसी दे दी गई.जिस भाई ने औरंगजेब को सिंहासन तक पहुंचाया उसी भाई को मौत की सजा दे दी. आने वाले समय में औरंगजेब ने अपनी बहन को भी मौत की सजा सुनाई थी. उस बहन ने भी औरंगजेब का खूब साथ दिया था.

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