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ऐसे शुरू हुआ था अप्रैल फूल बनाने का ट्रेंड, दुनिया में आज भी मशहूर हैं ये प्रैंक

आज अप्रैल की पहली तारीख यानी अप्रैल फूल डे है. आज के दिन लोगों को अपने साथियों या प्रियजनों के साथ मजाक और शरारत करने की छूट रहती है. यह परंपरा सदियों पुरानी है. ऐसे में जानते हैं कि अप्रैल फूड डे मनाने की शुरुआत कैसे हुई.

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अप्रैल फूल डे मनाने की परंपरा की ऐसे हुई थी शुरुआत (Photo - Pexels)
अप्रैल फूल डे मनाने की परंपरा की ऐसे हुई थी शुरुआत (Photo - Pexels)

अप्रैल फूल डे हर साल 1 अप्रैल को मनाया जाता है. कई सदियों से इस दिन को मूर्ख दिवस के तौर पर मनाने का ट्रेंड रहा है. हालांकि, इसकी उत्पत्ति का सटीक इतिहास आज तक एक रहस्य बना हुआ है. फिर भी आज हम जानने की कोशिश करेंगे की अप्रैल के पहले दिन शरारत या मजाक करने के ट्रेंड की शुरुआत को लेकर कौन-कौन सी कहानियां प्रचलित हैं. 

अप्रैल फूल डे परंपरा के मुताबिक, दूसरों के साथ पर शरारत, प्रैंक या मजाक करना शामिल होता है. इस दिन अक्सर मजाक के अंत में 'अप्रैल फूल' चिल्लाकर मजाक के शिकार व्यक्ति को 'अप्रैल फूल' बनाने का संकेत दिया जाता है. इस परंपरा की शुरुआत कैसे हुई, इसका सटीक इतिहास स्पष्ट नहीं है. फिर भी इसको लेकर कुछ कहानियां हैं जो सदियों पुरानी हैं और जो इशारा करती है कि अप्रैल फूल डे का इतिहास काफी पुराना है. 

अप्रैल फूल दिवस की उत्पत्ति
कुछ इतिहासकारों का मानना ​​है कि अप्रैल फूल दिवस की शुरुआत 1582 में हुई थी, जब फ्रांस ने 1563 में ट्रेंट परिषद द्वारा तय जूलियन कैलेंडर को ग्रेगोरियन कैलेंडर में बदल दिया गया था. जूलियन कैलेंडर में, हिंदू कैलेंडर की तरह, नया साल लगभग 1 अप्रैल से शुरू होता था.

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जिन लोगों को यह खबर देर से मिली या जो यह नहीं समझ पाए कि नए साल की शुरुआत 1 जनवरी को हो गई है और वे मार्च के आखिरी सप्ताह से लेकर 1 अप्रैल तक नया साल मनाते रहे. इस वजह से ऐसे लोग मजाक और शरारतों का निशाना बन गए और उन्हें 'अप्रैल फूल' कहा जाने लगा.

 इस दौरान मजाक या शरारतों का शिकार बने लोगों की पीठ पर कागज की मछली रखकर और उन्हें 'पोइसन डी एवरिल' (अप्रैल की मछली) कहा जाने लगा. इस तरह एक अप्रैल को होने वाली यह घटना किसी भोले-भाले व्यक्ति, जिसे आसानी से बेवकूफ बनाया जा सकता था या जिसके किसी के साथ भी मजाक किया जा सकता था, ऐसी शरारतों का  प्रतीक बन गया.

प्राचीन रोम में हिलारिया की परंपरा
इतिहासकारों ने अप्रैल फूल दिवस को हिलारिया (लैटिन में खुशियों का पल) जैसे त्योहारों से भी जोड़ा है , जो प्राचीन रोम में मार्च के अंत में साइबेले की पूजा करने वाले लोग मनाते थे. इसमें लोग अलग-अलग वेशभूषा पहनकर अपने आसपास के लोगों,  यहां तक ​​कि मजिस्ट्रेटों का भी मजाक उड़ाते थे.कहा जाता है कि यह परंपरा मिस्र की आइसिस, ओसिरिस और सेथ की पौराणिक कथा से प्रेरित था.

ऐसी भी अटकलें हैं कि अप्रैल फूल डे का संबंध वसंत शुरू होने से भी जुड़ा है. इसका मतलब वसंत के पहले दिन से है, जब प्रकृति ने बदलते, अप्रत्याशित मौसम से लोगों को मूर्ख बनाया था.

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अप्रैल फूल दिवस का ट्रेंड बन गया
अप्रैल फूल दिवस 18वीं शताब्दी के दौरान पूरे ब्रिटेन में फैल गया. स्कॉटलैंड में, यह परंपरा दो दिवसीय आयोजन बन गया. इसकी शुरुआत 'गॉक हंटिंग' से होती थी, जिसमें लोगों को नकली कामों पर भेजा जाता था (गॉक कोयल पक्षी के लिए एक शब्द है, जो मूर्खता का प्रतीक है) और इसके बाद टैली डे मनाया जाता था, जिसमें लोगों के साथ शरारतें की जाती थीं, जैसे कि के शरीर पर नकली पूंछ बना देना या पीठ पर - 'मुझे लात मारो' के संकेत चिपका देना जैसी शरारतें शामिल थीं. 

अप्रैल फूल डे की कुछ फेमस शरारतें
आधुनिक समय में, लोग अप्रैल फूल दिवस पर तरह-तरह के मनगढ़ंत मजाक रचने में कोई कसर नहीं छोड़ते. समाचार पत्र, रेडियो और टीवी स्टेशन तथा वेबसाइटें भी 1 अप्रैल की इस परंपरा में शामिल होकर मनगढ़ंत और हास्यास्पद दावे पेश करते रहे हैं, जिनसे उनके दर्शक मूर्ख बन जाते हैं. 

स्पेगेटी की पैदावार की रिपोर्ट
ऐसा ही एक प्रैंक 1 अप्रैल 1957 में, बीबीसी ने भी अपने दर्शकों के साथ किया था. जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि स्विस किसानों ने रिकॉर्ड तोड़ स्पैगेटी की फसल उगाई है और पेड़ों से नूडल्स तोड़ते लोगों का फुटेज दिखाया था.

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1985 में स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड के लेखक जॉर्ज प्लिम्टन ने कई पाठकों को तब धोखा दिया जब उन्होंने सिड फिंच नामक एक नवोदित पिचर के बारे में एक मनगढ़ंत लेख प्रकाशित किया, जो 168 मील प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से फास्टबॉल फेंक सकता था.

1992 में नेशनल पब्लिक रेडियो ने एक विज्ञापन प्रसारित किया जिसमें पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन यह कहते हुए दिखाई दिए कि वह फिर से राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन वास्तव में वह निक्सन नहीं बल्कि एक अभिनेता थे और यह पूरा सेगमेंट अप्रैल फूल डे का एक मज़ाक था जिसने पूरे देश को चौंका दिया.

1996 में, फास्ट-फूड रेस्टोरेंट चेन टैको बेल ने लोगों को तब एक मजाक का शिकार बनाया, जब उसने घोषणा की कि उसने फिलाडेल्फिया के लिबर्टी बेल को खरीदने पर सहमति जताई है और उसका नाम बदलकर टैको लिबर्टी बेल रखेगी. 

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