नरेंद्र यादव वो पत्रकार हैं जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बाद भी आसाराम के काले कारनामों को रिपोर्ट किया. 2013 में जब यह मामला इनतक पहुंचा तबसे लेकर आज तक ये इस मामले पर दो सौ से ज्यादा खबरें लिख चुके हैं. नरेंद्र को आश्रम की तरफ से पैसे ऑफर किए गए, उन्हें धमकाया गया और जब वो नहीं माने तो 2014 में उनपर जनालेवा हमला भी किया गया. उनके साथ एक सुरक्षाकर्मी रहता है और वो अपने साथ एक पिस्तौल भी रखते हैं.