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आजादी विशेष: 'बदलकर आंसुओं की धार को मैं मुस्कुराती हूं'

आज श्रीनगर देशभक्ति के रस में डूबा रहा. सभागार में वीर रस की कविताएं हुईं और जवानों की जुबां पर एक ही नारा था- भारत माता की जय. यह मौका था देश के 72वें स्वतंत्रता दिवस का. कवयित्री कविता तिवारी ने अपनी कविता 'बदलकर आंसुओं की धार को मैं मुस्कुराती हूं' को सुनाकर हर किसी का मन जीत लिया.

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