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पलायन की पीरः कोरोना कइले बा जुलुमवा

एक हुआ था पार्टीशन, धरम के नाम पर. लाखों लोग इधर से उधर हो गए. 70 साल बाद फिर हुआ एक पार्टीशन. ज़मीन नहीं बंटी, दिलों का बंटवारा हो गया. कोरोना के काले बादल जब मुलुक पर छाए तो हम एक होने की बजाय दोफाड़ हो गए. हवाई जहाज़ से आई विपदा ने लाखों को पैदल चला दिया हज़ारों मीलों के लंबे सफ़र पर. बंटवारा समाप्त हो चुका है. गांवों का वो हिस्सा जो शहरों को घर मान चुका था, उसे एहसास हो गया कि हिस्सेदारी नहीं है उसकी. पलायन की पीर को एक गीत में पिरोया है पाणिनि आनंद ने, साथ में उस दर्द को बयान करती तस्वीरें इंडिया टुडे ग्रुप के छायाचित्रकारों की हैं. वीडियो का निर्देशन, कॉन्सेप्ट और फोटो एडिटिंग बंदीप सिंह ने की.

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