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उत्तराखंड: चार धाम यात्रा पर रार, विपक्ष के साथ अपने भी उठा रहे सवाल 

लगभग पिछले दो सालों से चारधाम यात्रा बन्द पड़ी है. पर्यटन और तीर्थाटन पर टिका व्यवसाय पूरी तरह से धवस्त है. चारधाम से जुड़े सभी व्यवसाय ठप पड़े हैं. सरकार पर चारधाम यात्रा खोलने के लिए आम जनमानस का दबाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है.

बद्रीनाथ मंदिर (फाइल फोटो). बद्रीनाथ मंदिर (फाइल फोटो).
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आम आदमी पार्टी ने भी लिया आड़े हाथ 
  • विपक्ष के साथ अपने भी उठा रहे हैं सवाल 

लगभग पिछले दो सालों से चारधाम यात्रा बन्द पड़ी है. पर्यटन और तीर्थाटन पर टिका व्यवसाय पूरी तरह से धवस्त है. चारधाम से जुड़े सभी व्यवसाय ठप्प पड़े हैं. सरकार पर चारधाम यात्रा खोलने के लिए आम जनमानस का दबाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. पहले चारधाम यात्रा से जुड़े लोग और विपक्ष, सरकार पर चारधाम यात्रा खुलवाने के लिए दबाव बना रहा था, अब भाजपा सरकार के अपने ही लोग सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत से लेकर आम आदमी पार्टी के कर्नल कोठियाल के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि यात्रा खोलने को लेकर सरकार अब हाईकोर्ट पहुंच चुकी है जिस पर 16 सितंबर को सुनवाई होनी है.

जबरदस्त विरोध जारी, मुश्किल में व्यापारी

उत्तराखण्ड में चारधाम यात्रा मानों सरकार के गले की फांस बन चुकी है. चारधामों के तीर्थ पुरोहितों सहित पर्यटन से जुड़े व्यवसायी सरकार से बेहद नाराज चल रहे हैं और लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. हाल ही में बद्रीनाथ और गंगोत्री में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए. बद्रीनाथ धाम में सैकड़ों स्थानीय लोगों का जत्था खुद ही मंदिर दर्शन के लिए निकला जिनको स्थानीय पुलिस ने बेरिकेट्स लगाकर रोक दिया. यहां पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच जबरदस्त खींचतान देखने को मिली थी.

यमुनोत्री धाम में भी विरोध लगातार देखने को मिल रहा है, जहां यमुना घाटी में पर्यटन से जुड़े हुए छोटे बड़े व्यवसायियों ने चारधाम यात्रा शुरू करने को लेकर यमुनोत्री धाम के लिए कूच किया. लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस  ने इन सभी व्यवसायियों को जानकी चट्टी में बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया और आगे यमुनोत्री धाम में नहीं जाने दिया. जिसके बाद इन लोगों ने जमकर उत्तराखंड सरकार के खिलाफ जानकीचट्टी में नारेबाज़ी की.

सत्र में भी हुआ था हंगामा

विपक्ष लगातार सरकार को घेरने में लगा है. सत्र के दौरान भी लगातार सरकार चारधाम को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहा. आम आदमी पार्टी से लेकर कांग्रेस लगातार यात्रा खोलने को लेकर सरकार पर हमले कर रही है.

चारधाम का बहाना, 2022 का चुनाव है निशाना 

कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आजतक से बात करते हुए उत्तराखंड  सरकार को आड़े हाथों लेकर चारधाम यात्रा शुरू करने की सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए. हरीश रावत ने कहा कि सरकार  कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख पा रही है. कोर्ट ने सरकार से यात्रा शुरू करने से पहले कोरोना से बचने की तैयारियां क्या हैं? ये पूछा था ,पर सरकार कोर्ट में कुछ भी सही तरीके से प्रजेंट नहीं कर पाई जिस कारण कोर्ट को इस पर रोक लगानी पड़ी.

 कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का मानना  है कि कोर्ट ने सिर्फ ये चिंता जाहिर की थी कि कुम्भ की तरह यात्रा भी कहीं कोविड का कारण न बन जाय. इस पर सरकार की क्या तैयारी है, सरकार कोर्ट में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई,क्योंकि सरकार ने कोर्ट में नकारा वकीलों की फ़ौज तैयार कर रखी है.

हरीश रावत की मानें तो  नुकसान चारधामों के व्यवसायी और यहां के पर्यटन को भुगतना पड़ रहा है. हरीश रावत ने ये भी कहा कि कोरोना के हालातों से उनको भी प्रदेश की चिंता है पर क्या कोरोना के डर से इतने लोगों को भूखा मार देना ठीक है? पहले लोगों का पेट भर सके ये प्राथमिकता होनी चाहिए और वो भी तब जब प्रदेश में हर मंदिर खुला हो तो सिर्फ चारों धाम ही क्यों बन्द है.

आम आदमी पार्टी ने भी लिया आड़े हाथ 

आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा कर्नल कोठियाल ने भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं. कोठियाल ने कहा कि जब प्रदेश में सब पर्यटन स्थल खुलें हैं, सभी मंदिर खुलें हैं, सभी गतिविधियों पर कोई पाबंदी नहीं तो सिर्फ चारधाम के मंदिर ही क्यों बन्द हैं? इससे जाहिर होता है कि सरकार को यहां के लोगों से कोई मतलब ही नहीं रह गया है. सरकार सिर्फ और सिर्फ चुनाव पर ही ध्यान लगाए हुए है. सरकार के इस रवैये का 2022 के चुनाव में जनता मुंह तोड़ जवाब देगी.


विपक्ष के साथ अपनों की भी उठ रहे हैं सवाल 

विपक्ष ही नहीं सरकार के अपने भी अब सरकार पर निशाना साधने लग गए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी चारधामों में गतिविधियों को शुरू करनी की सलाह सरकार को दी है. पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आजतक से बात करते हुए  कहा कि सरकार को कोर्ट की बात रखते हुए कम से कम चारधामों के बाजारों सहित अन्य गतिविधियों को चालू कर देना चाहिए जिससे ठप्प पड़े व्यवसाय को थोड़ा गति मिल सके. उन्होंने कहा कि मंदिर दर्शन में बाहर से दूर रहकर दर्शन करने की अनुमति दी जानी चाहिए. साथ ही अन्य पर्यटन स्थलों को भी लोगों के लिए खोल देना चाहिए. सरकार को नियमों में थोड़ी ढिलाई करनी चाहिए जिससे लोगों का इन जगहों पर आना जाना शुरू हो और कारोबार को थोड़ा रफ्तार मिल सकें. बाज़ार खुले रहेंगे और रास्ते भी खुले रहेंगे तो चारधाम न सही पर आसपास की अन्य जगह पर लोग जा सकेंगे.

सरकार की आखिरी उम्मीद

चारों तरफ से बन रहे दबाव और आगामी चुनावों के मध्य नजर सरकार चारधामों के लोगों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती. इसलिए सरकार हाईकोर्ट में गयी है जिससे यात्रा जल्द शुरू हो सके. आगामी 16 को कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस बार कोर्ट से कोई सकारात्मक फैसला आयेगा. अब देखने वाली बात होगी जब कपाट बंद होने में कुछ ही माह शेष है, ऐसे में अगर सरकार को कोर्ट यात्रा शुरू करने की अनुमति दे भी देता है तो क्या कारोबारियों में जो नाराजगी अब तक फैल चुकी है वो कुछ कम होगी और आने वाले चुनाव में सरकार होने वाले नुकसान से बच पाएगी ? 

 

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