उत्तराखंड के पंचायत चुनाव में अब अधिकतम दो बच्चे वाले और पढ़े-लिखे उम्मीदवार ही लड़ पाएंगे. राज्य सरकार ने इसके लिए पंचायतीराज (संशोधन) अधिनियम 2019 को बुधवार को पारित कर दिया है. इस तरह आगामी चुनाव पंचायत चुनाव में 2 से ज्यादा बच्चों वाले प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के मकसद से पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन किया गया है.
पंचायती राज संशोधन बिल के अनुसार अब पंचायत चुनाव लड़ने के लिए शैक्षिक योग्यता भी निर्धारित कर दी गई है. इस संशोधन विधेयक के अनुसार, उत्तराखंड में पचायत चुनाव लड़ने के लिए सामान्य जाति के उम्मीदवारों को दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा. जबकि महिलाओं और अनुसूचित जाति और जनजाति के पुरुषों के लिये यह अर्हता आठवीं कक्षा पास होना होगा. अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिये पंचायत चुनाव लड़ने हेतु पाचवीं कक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी होगा.
पंचायतीराज संशोधन विधेयक के मुताबिक जिन लोगों की दो से अधिक संतान हैं और इनमें एक का जन्म इस प्रावधान के प्रवृत्त होने की तारीख से 300 दिन के पश्चात हुआ है, वह भी चुनाव लड़ नहीं सकते. विधेयक के मुताबिक पंचायत का कोई भी प्रतिनिधि एक साथ दो पद धारण नहीं कर सकेगा. यदि किसी सदस्य का नाम उससे संबंधित क्षेत्र की निर्वाचक नामावली से निकाल दिया गया हो तो संबंधित व्यक्ति पंचायत का प्रमुख व सदस्य नहीं रह पाएगा.
बता दें कि उत्तराखण्ड में करीब 50 हजार पंचायत प्रतिनिधि चुने जाते हैं. उत्तराखंड में अकेले हरिद्वार को छोड़कर बाकी पंचायतों का कार्यकाल जुलाई में खत्म हो रहा है. इसके चलते चुनाव अब सितंबर में हो सकते हैं. ऐसे में पंचायती राज संशोधन विधेयक के कानून बनने के बाद कई लोग यह चुनाव नहीं लड़ सकेंगे.
पंचायत प्रमुख पदों पर आरक्षण का प्रावधान रखा गया है. इनमें ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर आरक्षण का प्रावधान होगा. इन पदों को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लिए भी आरक्षित किया जा सकेगा. नए संशोधित विधेयक के आधार पर आने वाले पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं.
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