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कृषि संगठनों ने फिर दिखाई ताकत, क्या किसान करेंगे UP सरकार के वोट पर चोट?

कृषि संगठनों ने फिर दिखाई ताकत, क्या किसान करेंगे UP सरकार के वोट पर चोट?

वैसे तो कृषि कानूनों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के 1 साल पूरे होने के खिलाफ कृषि संगठनों का भारत बंद था. लेकिन दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर मोर्चा संभाल रहे राकेश टिकैत पर सबकी नजरें सबसे ज्यादा टिकी थीं. टिकैत पहले ही 2022 के यूपी चुनाव में बीजेपी को वोट की चोट देने का दम भर चुके हैं, तो भारत बंद में उनका निशाना यूपी सरकार सबसे ज्यादा देखा गया. राकेश टिकैत ने 1 दिन पहले गन्ने का समर्थन मूल्य 25 रुपया बढ़ाने के योगी सरकार के फैसले को वादा खिलाफी करार दे दिया. बीजेपी किसान संगठनों के निशाने पर है, लेकिन यूपी की योगी सरकार खुद को सबसे बड़ा किसान हितैषी बता रही है. गन्ना का समर्थन मूल्य बढ़ाने से लेकर, किसानों के ऊपर थोपे गए मुकदमे वापस लेने जैसे फैसलों को गिना रही है. क्या किसान करेंगे यूपी सरकार के वोट पर चोट? देखें ये वीडियो.

The Samyukta Kisan Morcha (SKM), an umbrella body of over 40 farmer unions, has called for a 'Bharat Bandh' on Monday to mark one year of the passage of the Centre's three farm laws. The call for the bandh has been supported by major opposition parties including the Congress, BSP, Aam Aadmi Party, Samajwadi Party, Telugu Desam Party, Left parties, and Swaraj India. But everyone's eyes were fixed on Rakesh Tikait, who was leading the front at Ghazipur border in Delhi. Rakesh Tikait termed the Yogi government's decision to increase the support price of sugarcane by Rs 25 a day ago as a breach of promise. BJP is on target of farmer organizations, but the UP government of Yogi Adityanath is stating it to be the biggest farmer-friendly. From increasing the support price of sugarcane to taking back the cases imposed on the farmers, it is justifying the works done in favor of farmers. Will farmers' protests affect the UP Government in the upcoming elections? Watch this video.

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