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यूपी में बिजली संकट, सपा-बीजेपी आमने सामने

यूपी में बिजली को लेकर सियासी महाभारत शुरू हो गई है. आज पूरे यूपी में बीजेपी ने बिजली की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. बीजेपी का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में बिजली को लेकर हाहाकार मचा हुआ है.

यूपी में बिजली को लेकर सियासी महाभारत शुरू हो गई है. आज पूरे यूपी में बीजेपी ने बिजली की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. बीजेपी का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में बिजली को लेकर हाहाकार मचा हुआ है.

लोकसभा चुनाव के पहले बिजली की व्यवस्था दुरुस्त थी और लोगों को बिजली मिल रही थी, लेकिन चुनाव में मिली करारी हार के बाद तो ऐसा लगता है समाजवादी पार्टी प्रदेश की जनता से हार का बदला लेने में लगी है. लखनऊ से लेकर वाराणसी हो या फिर अमेठी रायबरेली हो बिजली न आने से लोग बेहाल हैं. चुनाव के पहले बिजली 20 से 24 घंटे तक दी जाती थी, लेकिन चुनाव में मिली करारी हार के बाद तो लोग बिजली को तरस ही गए हैं.

हालांकि ऐसा नहीं है कि ये हाल पूरे प्रदेश का है. लोकसभा चुनाव में जिस जिले में सपा की जीत हुई हैं वहां बिजली अब भी बराबर दी जा रही है. यूपी बीजेपी ने बिजली कटौती के खिलाफ आज लखनऊ में यूपी पॉवर कार्पोरेशन के दफ्तर का ही घेराव कर दिया. इसके अलावा कानपुर, वाराणसी, झांसी से लेकर हर जिले मे प्रदर्शन भी किया गया. बीजेपी का आरोप है कि चुनाव के बाद से समाजवादी पार्टी ने बदले की नीयत से जानबूझकर बिजली सप्लाई घटा दी है जिससे हाहाकार मचा हुआ है. जबकि सपा के जिलों में लगातार सप्लाई जारी है.

बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कहना है कि 7मई के बाद जिस तरह बिजली आपूर्ति को घटाया गया है, उसके विरोध में सपा सरकार के खिलाफ हमारा प्रदर्शन है. वाजपेयी ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के आधार पर यूपी सरकार मैदान में आए. वाराणसी में नरेंद्र मोदी चुनाव क्या जीते, मानो यहां के लोगों के लिए बिजली को लेकर तो बेहद बुरे दिन आ गए हैं. चुनाव परिणाम बाद से ही यहां बिजली की घनघोर कटौती शुरू हो गई है.

सरकारी रोस्टर के मुताबिक बिजली की कटौती सिर्फ 4 घंटे की है, जबकि हालात ये है की 10 से 12 घंटे हर दिन बिजली का गुल रहना आम बात है. अधिकारी कहते हैं की ये कटौती लोकल फाल्ट की वजह से है. हालत ये है कि भीषण गर्मी में झुलस रहे लोगों के ऊपर बिजली की ये मार ये सोचने को मजबूर कर रही है कि ये कहीं मोदी को वोट देने की सजा तो नहीं मिल रही है.

मोदी के वाराणसी में जबरदस्‍त कटौती
बनारस की रहने वाली नजमा का कहना है कि जबसे मोदी सरकार यहां से जीती है, लाइट की हालत और भी खराब हो गई है. एमएल शर्मा, निदेशक तकनीकी बिजली विभाग, वाराणसी का कहना है कि 16 तारिख से हमारा शेड्यूल चार घंटे कटौती का है. यदि हमारी ग्रिड में दिक्कत आती है तब कभी कभी हमें ज्‍यादा कटौती करनी पड़ती है.

मु्ख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि बीजेपी राजनीति से प्रेरित होकर आरोप लगा रही है. गर्मी में बिजली संकट हो जाता है. इसे दुरुस्‍त करने के लिए काम किया जा रहा है और 2016 तक गांवों मे 18 घंटे और शहरों मे 22 से 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी.

ये हैं संकट के कारण
मायावती सरकार के समय में दिसंबर 2010 में दस हजार छह सौ चालीस मेगावॉट की नई बिजली परियोजना का जिम्‍मा कुछ निजी घरानों को दिया गया. इसमें यह शर्त थी कि यदि 18 महीने बाद भी अगर काम न शुरू हो सके तो करार रद्द हो जाना था. 500 करोड़ की उनकी जमानत भी रद्द हो जानी थी. लेकिन 18 महीने पूरा होने के बाद अखिलेश सरकार ने फिर उनको 18 महीने का समय दे दिया. दिसंबर 2013 में वो 18 महीने भी पूरे हो गए और फिर 18 महीने का समय दे दिया गया. पिछले दो साल में यूपी सरकार ने एक मेगावॉट बिजली का उत्पादन नहीं बढ़ाया है. इन तमाम चीजों के चलते यूपी में संकट बरकरार है.

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