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सपा के हंगामे पर बोले सीएम योगी-ज्यादा गर्मी न दिखाएं, सबका पेट दर्द दूर कर दूंगा

उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा के लोग ज्यादा गर्मी ना दिखाएं, जो जिस भाषा को समझता है, उसे उसी भाषा मे समझाया जाता है, सबके पेट का दर्द दूर कर दूंगा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो-PTI) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सपा पर सीएम योगी आदित्यनाथ के तेवर तल्ख
  • बोले- जिस भाषा में जो समझेगा, उसे उस भाषा में समझाएंगे

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर समाजवादी पार्टी (सपा) पर तल्ख होते जा रहे हैं. विधान परिषद में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान सपा के एमएलसी नाराज़ हुए और कई शब्दों पर आपत्ति जताई. इस पर सीएम योगी ने कहा कि सपा के लोग ज्यादा गर्मी ना दिखाएं, जो जिस भाषा को समझता है, उसे उसी भाषा मे समझाया जाता है.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सदन में पहले अपना आचरण सुधारे, सुनने की आदत डालें सपा के लोग, सबके पेट का दर्द दूर कर दूंगा. दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ गुरुवार को विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे थे. इसी दौरान सीएम योगी ने किसानों का मसला उठाया, जिस पर सपा के सदस्य हंगामा करने लगे.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहले मुस्कुरा कर कहा, 'आप लोग सदन की गरिमा को सीखिए, मैं जानता हूं कि आप किस प्रकार की भाषा और किस प्रकार की बात सुनते हैं, और उसी प्रकार का डोज भी समय-समय पर देता हूं.' यह सुनते ही सपा के सदस्य आग बबूला हो गए और हंगामा करने लगे.

इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ का पारा भी गर्म हो गया और उन्होंने कहा, 'गर्मी यहां दिखाने की आवश्यकता नहीं है, सदन है, इसकी मर्यादा का पालन कीजिए, और पालन करना सीखिए, जो जिस भाषा को समझेगा, उसे उस भाषा में जवाब मिलेगा, अगर बोलते हैं तो सुनने की भी आदत डालिए.'

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'संसदीय लोकतंत्र की सभी परम्पराओं का हम सम्मान करते हैं, अगर किसी को गलतफहमी होगी कि सदन में जितनी उद्दंडता कर लेगा, उसकी उतनी तारीफ होगी, ये उसकी गलतफहमी होगी, हम ऐसा आचरण करें कि जनता उसका अनुसरण करेगी, विश्वसनीयता का संकट खत्म होना चाहिए, अच्छे आचरण को जनता फॉलो करती है.'

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'सदन में चिल्लाने से काम नहीं चलता, विश्वसनीयता का संकट खत्म हुआ, स्टेट गेस्ट हाउस कांड कौन नहीं जानता है, आजादी के पहले नेता सम्मानित शब्द था, आजादी के बाद नेता शब्द का सम्मान खत्म हुआ, हर कोई इसके लिए जिम्मेदार है, इसके बारे में हमसब को सोचने की जरूरत, जनता को प्रेरित करना हम सबका दायित्व है.'

 

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