उत्तर प्रदेश विधासभा की कार्यवाही में नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं. पहले महिला विधायकों को अपनी बात रखने के लिए एक दिन दिया गया था तो वहीं अब उन विधायकों को बोलने का मौका दिया जा रहा है, जिन्होंने अब तक की कार्यवाही में एक भी सवाल-जवाब नहीं किए हैं.
बता दें कि 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश की विधानसभा में 100 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने बजट और मानसून सत्र के दौरान कुछ भी नहीं बोला है. इन विधायकों को अब शीतकालीन सत्र में बोलने के लिए एक दिन का समय दिया जाएगा. इस दिन सिर्फ यही विधायक बोलेंगे. हालांकि, फिलहाल इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है. इस बार यूपी विधानसभा का शीतकालीन सत्र नवम्बर के अंतिम सप्ताह या दिसम्बर के पहले सप्ताह में होगा.
हाल ही में 22 सितंबर को यूपी की विधानसभा और विधान परिषद में सिर्फ महिला विधायकों का विधान परिषद सदस्यों को बोलने के लिए एक दिन दिया गया था. इस कदम की सत्ताधारी दल समेत सभी विपक्षी पार्टियों ने सराहना की थी.
सत्र की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उद्घाटन भाषण से हुई थी. उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के उत्थान की दिशा में काम कर रही है. सीएम योगी ने आगे कहा कि हमने देखा है कि सदन में पुरुष नेताओं की बातों के पीछे महिला सदस्यों की आवाज दबा दी जाती है. लेकिन आज सदन की कार्यवाही में उन्हें महिला सदस्यों की बातें सुनकर अपनी गलती का अहसास होना चाहिए.
इस दौरान महिला सदस्यों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बात की. कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने महंगाई का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि महिलाओं की बेहतरी के लिए राज्य में महंगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण होना चाहिए. महिलाएं घरेलू बजट संभालती हैं, और तेल और गैस की कीमत बढ़ गई हैॉ.
समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों का मुद्दा उठाया और लखनऊ, गोरखपुर और राज्य के अन्य जिलों की घटनाओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि राज्य में महिलाएं सुरक्षित रहें और महिलाओं के खिलाफ अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाने चाहिए.
विपक्ष के नेता अखिलेश यादव ने कहा की महिलाओं के मुद्दों को कवर करने के लिए केवल एक दिन आरक्षित करना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं, जिसमें राज्य के लखीमपुर खीरी और हाथरस की घटनाएं भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें अवसर प्रदान करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है.
अखिलेश यादव वे आगे कहा कि पार्टी की राजनीति से अलग मैं कहना चाहता हूं कि मैं समाचार पत्रों को पढ़कर में हैरान हूं. अभी तक कई सख्त कानून पारित किए गए हैं, अपराध के आंकड़े बढ़ रहे हैं. हमें उनकी शिक्षा, उनकी सुरक्षा और उन्हें आत्मविश्वास देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए.