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हौसले की मिसाल: 55, 51 और 49 साल की उम्र में सरकारी नौकरी का सपना पूरा

उन्नाव के बीघापुर तहसील क्षेत्र में रहने वाले इन तीनों लोगों ने 2016 में माध्यमिक सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) परीक्षा दी थी. इस परीक्षा के नतीजे अब आए और तीनों TGT बन गए हैं.

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ईश्वरदीन को 51 साल की उम्र में मिली नौकरी ईश्वरदीन को 51 साल की उम्र में मिली नौकरी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तीन ने अधिक उम्र में पास की टीजीटी परीक्षा
  • सफलता के बाद युवा पीढ़ी के लिए बने प्रेरणा 

जहां चाह है, वहां राह है. इसकी मिसाल हैं यूपी के उन्नाव जिले के तीन शख्स जिन्होंने सरकारी नौकरी पाने के लिए कभी हिम्मत नहीं छोड़ी. अब इन्हें 49 से 55 साल की उम्र में सरकारी नौकरी नसीब हुई है. इनमें से एक शख्स ने तो अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इतनी उम्र होने के बावजूद शादी तक नहीं की.  

उन्नाव के बीघापुर तहसील क्षेत्र में रहने वाले इन तीनों लोगों ने 2016 में माध्यमिक सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) परीक्षा दी थी. इस परीक्षा के नतीजे अब आए और तीनों TGT बन गए हैं. इस परीक्षा के लिए अधिकतम उम्र सीमा 50 वर्ष की है. लेकिन जब इन तीनों ने आवेदन किया था तो तीनों की उम्र 50 साल से नीचे थी.  

मनबोधन सिंह   

उन्नाव की बीघापुर तहसील के रायपुर गांव के रहने वाले मनबोधन सिंह 49 साल के हैं. वो टीजीटी बनने के बाद बहुत खुश हैं. आखिर इस उम्र में ही सही उनका सरकारी शिक्षक बनने का सपना जो पूरा हो गया. उनकी दो बेटियां पहले से ही सरकारी नौकरी में हैं. एक उत्तर प्रदेश पुलिस में महिला आरक्षी के पद पर और दूसरी औद्योगिक सुरक्षा बल तमिलनाडु में तैनात है. अब तक मनबोधन बैसवारा महाविद्यालय में हिंदी, संस्कृत पढ़ाते रहे हैं.

मनबोधन सिंह
मनबोधन सिंह

साल 1994 में एम ए करने के बाद से ही वो सरकारी नौकरी के लिए प्रयास करते रहे. 1996 में लेखपाल परीक्षा पास भी की लेकिन इंटरव्यू में नाकाम रहे. UP-TET की परीक्षा में पहले दो बार लिखित पास करने के बाद भी इंटरव्यू में सफल नहीं हो सके. 2016 में फिर ये परीक्षा दी और अब जाकर 2021 में इसका नतीजा आया और मनबोधन का सरकारी शिक्षक बनने का सपना पूरा हुआ. मनबोधन ने इतने वर्षों में पढ़ाई का साथ नहीं छोड़ा. उन्होंने तीन विषयों में एमए किया है. मनबोधन के परिवार में मां पत्नी, दो बेटियां और दो बेटे हैं. मनबोधन के मुताबिक उनके इस संघर्ष में परिवार और कुछ दोस्तों ने भी पूरा साथ दिया.  

ध्यानचंद  

इसी तरह बीघापुर तहसील के ही मजरा रुदीखेड़ा गांव के रहने वाले ध्यानचंद की उम्र 55 साल है. हालांकि अब टीजीटी बनने के बाद उन्हें सरकारी सेवा में सात साल काम करने का ही मौका मिलेगा. सरकारी शिक्षक बनने का ध्यानचंद का ये जुनून ही था कि उन्होंने शादी तक नहीं की.

55 साल के हैं ध्यानचंद
55 साल के हैं ध्यानचंद

ध्यानचंद का कहना है कि सरकारी शिक्षक बनने के लिए परीक्षा पास करने से वो बहुत खुश हैं. इससे पहले इस काम में उन्हें कई बार नाकामी हाथ लगी. ध्यानचंद ने बताया, “2013 में इंटरव्यू स्टेज तक पहुंचने के बाद भी फाइनल नतीजे में कुछ नंबर से रुक गया. 2016 में जब टीजीटी परीक्षा दी तो करीब 8 से 10 घंटे हर दिन इसके लिए पढ़ाई की. मेरा बड़ा भाई प्राइवेट नौकरी करता है. उसने मेरे लिए इस संघर्ष में बहुत साथ दिया. वही मेरा खर्च चलाते रहे. युवा पीढ़ी से भी मेरा यही कहना है कि अगर संघर्ष करते रहेंगे तो एक न एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी.   

ध्यानचंद ने बताया कि उनकी छोटी बहनों, यहां तक कि भतीजों की भी शादी हो गई. लेकिन उन्होंने वचन ले रखा था कि शिक्षक बनने का सपना पूरा होने के बाद ही शादी करूंगा. ध्यानचंद के मुताबिक उनका लक्ष्य पूरा हो चुका है इसलिए अब उनका शादी का भी इरादा है.   

ईश्वरदीन  

बीघापुर तहसील के भगवानखेड़ा गांव निवासी ईश्वरदीन 51 साल के हैं.  ईश्वरदीन हिन्दी और संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड हैं. वे अब तक चंद्रिका देवी इंटर कालेज तनगापुर में 2010 से संस्कृत विषय के शिक्षक पद पर सेवा दे रहे हैं. लेकिन सरकारी शिक्षक बनने का सपना उनका अब पूरा हुआ है. उन्होंने (UP-TET) की परीक्षा पहले भी पास की थी लेकिन मेरिट में नाम नीचे रहा था. ईश्वरदीन के मुताबिक प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ाते हुए बहुत कम पैसे मिलते थे लेकिन घर चलाने के लिए ऐसा करना जरूरी था. साथ में प्राइवेट ट्यूशन भी देता रहा. उनकी पत्नी भी टाट बनाकर घर का खर्च चलाने में साथ देती रहीं. ईश्वरदीन के चार बच्चे हैं. ईश्वरदीन जिस चंद्रिका विद्यालय में पढ़ाते रहे, वहीं से उनके बच्चों की शिक्षा का भी इंतजाम हो गया. ईश्वरदीन बताते हैं कि बचपन से ही उनका जीवन बहुत संघर्ष में बीता क्योंकि बहुत छोटी उम्र में ही जब वो पांचवीं कक्षा में थे तो पिता का साया उनके सिर से उठ गया था.  

ईश्वरदीन ने कहा कि उनका युवा पीढ़ी से यही कहना है कि कभी हार नहीं मानें, लक्ष्य पाने के लिए हमें यह देखना चाहिए कि हमारे अंदर क्या कमियां हैं, फिर उन्हें सुधारने की कोशिश करनी चाहिए. सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं होता इसलिए अपने लक्ष्य के लिए कभी कोई गलत कदम नहीं उठाना चाहिए.

 

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