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फिरोजाबादः 60 तक पहुंचा मृतकों का सरकारी आंकड़ा, निजी अस्पतालों में भी बेड खाली नहीं

निजी अस्पतालों के जनरल वार्ड में भी स्थिति खराब है. फिरोजाबाद में वायरल और डेंगू का कहर किस कदर लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है इसकी बानगी जनरल वार्ड में दिखाई पड़ेगी जहां हर बेड पर सिर्फ और सिर्फ बच्चे दिखाई पड़ते हैं.

फिरोजाबाद के अस्पताल में बड़ी संख्या में भर्ती बच्चे (फोटो-आजतक) फिरोजाबाद के अस्पताल में बड़ी संख्या में भर्ती बच्चे (फोटो-आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पिछले 24 घंटों में 207 नए मरीज भर्ती, 163 डेंगू के मरीज
  • शहर के अस्पताल मरीजों को आगरा के लिए रेफर कर रहे
  • निजी अस्पतालों में भी इलाज नहीं, आगरा जाना पड़ रहाः परिजन

योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा तमाम कोशिशों के दावों के बावजूद फिरोजाबाद में ना लोगों के मरने का सिलसिला रुक रहा है ना ही वायरल और डेंगू का कहर रुकने का नाम ले रहा है. आलम यह है कि अस्पतालों में बेड मिलना मुश्किल हो गया है. हालात इस कदर भयावह हो गए हैं कि अब तक सरकारी आंकड़ों में मरने वालों की संख्या 60 तक पहुंच गई है.

फिरोजाबाद के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर दिनेश कुमार प्रेमी कहते हैं कि अब तक 60 लोगों की मौत दर्ज की गई है जिनमें से 5 डेंगू से मरे हैं जबकि बाकियों में बुखार से मौत हुई है और मृत्यु का ऑडिट लगातार चल रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 15 सितंबर की सुबह तक कुल 458 मरीज अस्पताल में भर्ती थे और पिछले 24 घंटों में 207 नए मरीज भर्ती किए गए थे. इनमें अकेले 163 डेंगू के मरीज हैं. ‌

फिरोजाबाद से लोगों को लगातार आगरा रेफर कर दिया जा रहा है. सरकारी अस्पतालों तो छोड़िए निजी अस्पतालों में भी हालात गंभीर बने हुए हैं. फिरोजाबाद के सबसे बड़े निजी अस्पतालों में से एक यूनिटी अस्पताल में मरीजों की बड़ी संख्या है‌. बाहर तीमारदारों का जमावड़ा है. रोते बिलखते लोग नजर आते हैं तो कुछ अपनों को लेकर दौड़ते-भागते दिखाई पड़ रहे हैं.

'प्लेटलेट्स गिरने लगे तो आगरा रेफर'

किशोर के भाई की तबीयत बिगड़ गई और प्लेटलेट्स गिरने लगे तो अब उसे यूनिटी अस्पताल से आगरा के लिए रेफर कर दिया गया है. किशोर कहते हैं कि सरकारी अस्पताल में सुनवाई है नहीं और निजी अस्पतालों में भी जब इलाज नहीं मिल रहा है तो अब आगरा भागना पड़ रहा है.

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रामकिशोर वर्मा का नाती भी यूनिटी अस्पताल में भर्ती है. रामकिशोर कहते हैं, "शुक्रवार की रात को मेरे नाती को बुखार आया तब से बुखार उतरा नहीं है और छोटे-मोटे डॉक्टर से पहले हम दवा ले रहे थे. फिर उसे यहां निजी अस्पताल ले आए. उसका प्लेटलेट 20,000 तक आ गया था. प्राइवेट ट्रामा सेंटर में प्लेटलेट की जानकारी मिलने के बाद हम बच्चे को यहां ले आए और अब वह यहां भर्ती है. सारी रात भागते रहे तब बच्चे के लिए प्लेटलेट मिल पाया. मेरे बेटे ने अपना खून दिया तब उसे उसके बेटे के लिए प्लेटलेट मिला."

'गांव में स्थिति बेहद गंभीर'

इसी तरह पिंटू सिंह कहते हैं कि, "मेरा भतीजा 3 साल का है और उसका भी प्लेटलेट नीचे आ गया है और डेंगू पॉजिटिव होने के बाद उसे यहां लाना पड़ा. हम अपने भतीजे को लेकर के पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज लेकर गए लेकिन वहां बेड देने से मना कर दिया."

रामकिशोर और अस्पताल के बाहर दूसरे कई तीमारदारों ने कहा कि उनके गांव में स्थिति बेहद गंभीर है और हर घर में महामारी फैली हुई है. करगौली गांव से आए सुरेश कहते हैं कि गांव में ना तो सरकारी बंदोबस्त है और ना कोई दवा बांटने के लिए आया. ना कोई साफ-सफाई है, ना ही प्रशासन की ओर से छिड़काव करने आ रहा है. ज्यादातर लोगों की शिकायत है कि सरकारी अस्पताल में सुनवाई है ही नहीं इसलिए निजी अस्पतालों की और उन्हें आना पड़ रहा है. उस से भी बदतर आलम यह है कि हर किसी के गांव में यह आपदा थमने का नाम नहीं ले रही है. ‌

महामारी जैसी परिस्थिति में सरकारी दावों की पड़ताल निजी अस्पतालों में की जा सकती है. यूनिटी अस्पताल के प्रबंधक विकास जैन कहते हैं कि फिलहाल उनके 70 बेड वाले अस्पताल में अब बेड खाली नहीं है और हर बेड पर मरीज हैं क्योंकि पिछले कुछ दिनों में यह स्थिति ज्यादा बिगड़ी है. विकास जैन का कहना है कि कई मरीजों में जब प्लेटलेट गिरने की शिकायत होती है तो वह आगरा शिफ्ट हो जाते हैं. उनके मुताबिक पिछले सात-आठ दिनों में यह परिस्थिति ज्यादा बिगड़ी है.

हर बेड पर सिर्फ और सिर्फ बच्चे

निजी अस्पताल के जनरल वार्ड में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है. फिरोजाबाद में वायरल और डेंगू का कहर किस कदर लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है इसकी बानगी जनरल वार्ड में दिखाई पड़ेगी जहां चारों तरफ हर बेड पर सिर्फ और सिर्फ बच्चे दिखाई पड़ते हैं. बच्चों के साथ उनके माता-पिता उनका ख्याल रख रहे हैं.

जब बच्चों की जान पर खतरा बन जाए तो मां-बाप भी भगवान का सहारा लेते हैं. एक मां अस्पताल के बेड पर इस उम्मीद से कागज पर राम नाम लिख रही हैं कि ईश्वर उनके बच्चे को बचा लेंगे.

राम नाम के सहारे रोली गुप्ता अपने बेटे के पास उसी बेड पर बैठ कर बेटे के पूरी तरह ठीक होने का इंतजार कर रही हैं. रोली गुप्ता कहती हैं, "बेटे को डेंगू हो गया था और 5 दिन से वह भर्ती है. राम का नाम लिख रहे हैं ताकि हनुमान जी चमत्कार कर लें, वैसे मेरे बेटे की तबीयत अब ठीक हो गई है. प्लेटलेट गिरकर 27000 हो गई थी और अब 64000 हो गई है. यह डॉक्टरों का आशीर्वाद है जो भगवान के रूप में आकर मेरे बच्चे को बचा लिया."

बेंच भी इमरजेंसी बेड में तब्दील

ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अविनाश बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और ऐसे में डेंगू मरीज ज्यादा हैं. डॉक्टर अविनाश ने आजतक को बताया, "हमारे पास सारे बेड फुल है और सब में डेंगू पॉजिटिव आ रहा है, जिनमें वायरल बुखार ज्यादा है. हमारे यहां अब तक दो मौत हुई है." 

डॉक्टर अविनाश बताते हैं कि जब हमारे पास बेड नहीं है ऐसे में 10 परसेंट लोगों को रोज हमें रेफर करना पड़ रहा है. ऐसे में 8 से 10 मरीज ऐसे आते हैं जिन्हें हम रेफर कर देते हैं. लगभग 80 फीसदी मरीज डेंगू के मरीज हैं." 

अस्पताल में स्थिति इस कदर विकराल है कि प्रबंधन ने मरीजों के तीमारदारों के बैठने वाली बेंच को भी इमरजेंसी बेड में तब्दील कर दिया है ताकि कुछ नौनिहालों की जिंदगी बचाई जा सके और उनका इलाज हो सके.

इस बीच फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज से कई ऐसी तस्वीरें वायरल हुईं जो सरकार और प्रशासन के दावों के बेहद विपरीत थीं. अस्पताल के बाहर हमें तौफीक के माता-पिता और उनका पूरा परिवार रोता भी लगता नजर आया. तौफीक के पिता ने बताया कि बेटे को यहां लेकर तो आए हैं लेकिन अब अस्पताल कह रहा है कि उन्हें आगरा ले जाइए.

जब आजतक ने दिलवाया बेड

आजतक संवाददाता आशुतोष मिश्रा ने तौफीक के पिता और उनके पूरे परिवार की गुहार सुनकर सरकारी अस्पताल में ड्यूटी डॉक्टर से बात करने की कोशिश की. अस्पताल के डॉक्टर ने कहा कि वह मरीज के परिवार से मिलेंगे. आजतक के कैमरे के सामने अस्पताल प्रबंधन ने तौफीक के पिता को उनके बच्चे के पास वार्ड में भेज दिया. यह भी जानकारी दी गई कि उन्हें आगरा रेफर नहीं किया जाएगा. आजतक ने यह जानकारी तौफीक की मां और उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को दी ताकि उनके आंसू थम सकें.

पैनिक फैलाया गयाः प्रिंसिपल डॉक्टर संगीता

इस मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर संगीता अनेजा कहती हैं कि यह हालात इसलिए भी बिगड़े हैं क्योंकि पैनिक फैलाया गया. परिस्थिति के लिए डॉक्टर संगीता मीडिया को जिम्मेदार बता रही हैं. वह कहती हैं, "थोड़ा सा पैनिक क्रिएट किया गया है नहीं तो मरीज हर बार आते थे और इलाज करवा कर चले जाते थे लेकिन इस बार पैनिक क्रिएट किया गया जिससे वर्क लोड बढ़ गया." 

डॉक्टर संगीता ने दावा किया कि हमारे पास 540 बेड और 50 से 70 बेड हम हमेशा खाली रखते हैं. इतना ही नहीं डॉक्टर संगीता का यह भी कहना है कि मरीज बेड के लिए दबाव डालते हैं इसलिए अस्पताल के ज्यादातर बेड फुल हैं और कुछ बेड आपात परिस्थिति के लिए रखे गए हैं. इस मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल भी मानती है कि अब तक 13 लोगों की मौत हुई है जिनमें से आठ डेंगू के थे लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है. 

अमूमन मॉनसून के खत्म होते होते वायरल देश के सभी हिस्सों में दस्तक तो देता है लेकिन इस साल फिरोजाबाद में यह एक रहस्य बनकर रह गया. टेस्टिंग की पर्याप्त व्यवस्था है नहीं और प्रशासन सरकार की कोशिशें इस विभीषिका के आगे सरेंडर हो गई हैं, ऐसे में लोग भगवान भरोसे हैं. सवाल ये बरकरार है कि फिरोजाबाद की त्रासदी का अंत कब होगा.

 

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