आगामी विधानसभा चुनाव 2022 के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती अल्पसंख्यकों के लिए नया प्लान तैयार किया है. इसके तहत 403 विधानसभा क्षेत्रों में एक प्रभारी के साथ सह प्रभारी और बूथ अध्यक्ष पर अल्पसंख्यकों की नियुक्ति की गई है. जानकारी के मुताबिक बीएसपी (BSP) ने कोऑर्डिनेटर्स को निर्देश दिया है कि प्रत्येक जिले की विधानसभा में नियुक्त किए गए सभी अल्पसंख्यक प्रभारी और सह-प्रभारी के साथ बूथ प्रभारी पार्टी की नीतियों के बारे में लोगों को बताएं.
बीएसपी के प्रवक्ता और कोऑर्डिनेटर मोहम्मद फैजान खान के मुताबिक, बहुजन समाज पार्टी (BSP) 'बहुजन सुखाय बहुजन हिताय' के नारे पर चलती है, जिसमें वह अल्पसंख्यकों के लिए भी जिम्मेदारी से आगे बढ़ रही है. नियुक्त किए गए अल्पसंख्यक प्रभारी और सह-प्रभारी के साथ बूथ प्रभारी मुस्लिम समुदाय के बीच जाकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की नीतियों के बारे में बताएंगे. और ये भी बताएंगे कि किस तरीके से समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने मुसलमानों को सिर्फ वोट की राजनीति के लिए प्रयोग किया है.
बीएसपी का सियासी ग्राफ लगातार गिर रहा
दरअसल, 2012 के विधानसभा चुनाव बाद से बसपा का सियासी ग्राफ नीचे गिरता जा रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी का खाता नहीं खुला और 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए महज 19 सीटें ही जीत सकी थी, लेकिन उसके बाद से यह आंकड़ा घटता ही जा रहा है. बसपा के साथ 7 विधायक ही बचे हैं और बाकी विधायक बागी हो गए.
बीएसपी में मुस्लिम चेहरों की किल्लत
मायावती के कई मुस्लिम कद्दावर नेताओं के दूसरी पार्टियां ज्वाइन करने के बाद से बीएसपी में मुस्लिम चेहरा का टोटा पड़ गया है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर तीन मुस्लिम सासंद जीते हैं, जिनमें सहारनपुर से हाजी फजलुर्रहमान और अमरोहा से कुंवर दानिश अली जबकि गाजीपुर से अफजाल अंसारी हैं. इन तीनों नेताओं को छोड़कर बाकी तमाम मुस्लिम नेता पार्टी को अलविदा कह चुके हैं, जिसके चलते मुस्लिम चेहरे कमी पार्टी को महसूस होने लगी है.