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यूपी विधानसभा उपाध्यक्ष का चुनाव, बीजेपी पर अपना दल ने बढ़ाया प्रेशर

उत्तर प्रदेश विधानसभा स्पीकर हृदय नारायण दीक्षित ने विधानसभा उपाध्यक्ष के पद पर चुनाव के लिए18 अक्टूबर की तारीख घोषित कर दी है. उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में चल रही जोर आजमाइश के बीच बीजेपी के सहयोगी अपना दल (एस) ने इस पद पर पिछड़े या फिर किसी दलित समाज के नेता को बिठाने की मांग की है जबकि सरकार सपा के बागी विधायक नितिन अग्रवाल को बनाने का प्लान बना रही है.

यूपी विधान भवन यूपी विधान भवन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • विधानसभा उपाध्यक्ष का 18 अक्टूबर को चुनाव
  • अपना दल ने दलित-ओबीसी को बनाने की मांग की
  • नितिन अग्रवाल को बनाने की चर्चाएं तेज हैं

उत्तर प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. विधानसभा स्पीकर हृदय नारायण दीक्षित ने विधानसभा उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिए 18 अक्टूबर की तारीख घोषित कर दी है, जिसके लिए नामांकन 17 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक भरे जाएंगे. ऐसे में विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में चल रही जोर आजमाइश के बीच बीजेपी के सहयोगी अपना दल (एस) ने इस पद पर पिछड़े या फिर किसी दलित समाज के नेता को बिठाने की मांग की है.  

अपना दल ने चला दलित-ओबीसी कार्ड

यूपी में योगी सरकार में शामिल अपना दल (एस) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल लगातार बीजेपी पर दबाव बनाने में जुटे हैं. ऐसे में आशीष पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को विधानसभा का उपाध्यक्ष किसी पिछड़े या अनुसूचित जाति के विधायक को बनाना चाहिए. अपना दल (एस) ने यह मांग ऐसे समय उठाई है जब सूबे में दलित और ओबीसी को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में शह-मात का खेल चल रहा है. 

नरेश अग्रवाल के बेटे की चर्चा तेज 

बता दें कि सपा छोड़कर बीजेपी में आए पूर्व राज्यसभा सदस्य नरेश अग्रवाल के पुत्र और हरदोई से सपा के बागी विधायक नितिन अग्रवाल उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष बनाए जाने की तैयारी चल रही है. बीजेपी 2022 के चुनाव से पहले नितिन अग्रवाल को उपाध्यक्ष बनाकर सूबे के वैश्य समुदाय को बड़ा सियासी संदेश देने की रणनीति है. बीजेपी की इस मंशा पर अब अपना दल (एस) पलीता लगाती नजर आ रही है और पिछड़े या दलित कार्ड खेल दिया है. 

बीजेपी पर अपना दल दबाव बनाने में जुटे 

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) लगातार बीजेपी पर दबाव बनाने में जुटी है. पिछले दिनों सूबे के लखीमपुर खीरी कांड में भी अपना दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आशीष पटेल ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को गिरफ्तार करने की मांग की थी और उनकी गिरफ्तारी के बाद योगी सरकार को धन्यवाद भी दिया था. लेकिन, अब जिस तरह से उन्होंने विधानसभा उपाध्यक्ष के पद पर दलित और ओबीसी के किसी विधायक को बैठाने की मांग उठाई है, वो बीजेपी के लिए चिंता बढ़ा सकती है. 

18 अक्टूबर को उपाध्यक्ष का चुनाव

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 18 अक्तूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें हृदय नारायण दीक्षित ने विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने की घोषणा की है. बीजेपी सपा के बागी विधायक नितिन अग्रवाल को उपाध्यक्ष बनाने की कवायद में है. ऐसे में यह पहला मौका होगा जब सूबे की बीजेपी सरकार में विपक्षी दल के विधायक को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाया जाएगा.

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेश अग्रवाल ने सपा छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ली थी, लेकिन उन्हें सम्मानजनक जिम्मेदारी अभी तक बीजेपी में नहीं मिली है. हालांकि, नरेश के बीजेपी आने से पार्टी को हरदोई की सीटों पर मजबूती मिली है. इसके बावजूद नरेश को न तो राज्यसभा भेजा और न ही उन्हें किसी महत्वपूर्ण पद पर समायोजित किया.

अब विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए एक-एक सीट महत्वपूर्ण है, जिसे देखते हुए बीजेपी उनके बेटे नितिन अग्रवाल को उपाध्यक्ष बनाने का दांव चला है. हालांकि, बीजेपी के इस प्लान पर अपना दल (एस) ने ओबीसी और दलित कार्ड फेंककर चिंता बढ़ा दी है.

 

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