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कोरोना की दूसरी लहर में योगी सरकार ने किया था सर्वश्रेष्ठ प्रयास, IIT कानपुर के रिसर्च में दावा

प्रोफेसर का कहना है कि हमने अपने आंकड़ों के आधार पर पाया कि मध्य अप्रैल से मई के बीच योगी सरकार ने जो कदम उठाए वो सही साबित हुए. सरकार ने रिस्क भी लिया और पूर्ण लॉकडाउन नहीं लगाया.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल-पीटीआई) यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणीन्द्र ने किया रिसर्च
  • किताब कोविड संग्राम यूपी मॉडल नीति युक्ति परिणाम में दावा
  • 120 पेज की किताब में योगी सरकार के प्रयास को सराहा

कोरोना की दूसरी लहर को लेकर विपक्षी पार्टियां योगी आदित्यनाथ सरकार पर चाहे नाकामी के जितने भी आरोप लगाए लेकिन आईआईटी कानपुर के रिसर्च में प्रदेश सरकार की ओर से दूसरी लहर को कंट्रोल करने के जो कदम उठाए गए उसे उस समय के पेंडेमिक समय के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ पाया गया है.

आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल की टीम ने कई महीनों की रिसर्च के बाद यह निष्कर्ष निकला है. इतना ही नहीं प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने अपनी रिसर्च को एक किताब के रूप में प्रकाशित भी किया है. कोविड संग्राम यूपी मॉडल नीति युक्ति परिणाम नाम की ये किताब अब देश में राजनीतिक हलके में चर्चा का विषय बनी हुई है.

विपक्ष जहां कोरोना की त्रासदी को लेकर योगी सरकार को घेरने में लगा था तो वहीं आईआईटी ने सरकार के उठाए कदमों को एक नजीर जैसा पाया है. आजतक ने इस मामले पर बुक को प्रकाशित करने वाले प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल से बात की. प्रो. मणीन्द्र का कहना है कि ये किताब यूपी मॉडल के आधार पर है, इसमें हमने यूपी सरकार से भी डेटा लिया था जिसका पूरा विस्तृत अध्ययन करके हमने छापा है. हमने किताब का नाम कोविड संग्राम यूपी मॉडल नीति युक्ति परिणाम रखा है. 120 पेज की यह किताब अब चर्चा का विषय बनी है.

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आईआईटी में डिप्टी डायरेक्टर रहे हैं प्रोफेसर मणीन्द्र 
प्रोफेसर मणीन्द्र आईआईटी में पूर्व डिप्टी डायरेक्टर भी रह चुके हैं. इस समय उनके कोरोना अध्ययन की पूरे देश में चर्चा रहती है क्योंकि उन्होंने ही अपने डेटा अध्ययन के आधार पर दो महीने पहले ही कह दिया था कि अगर कोरोना वायरस में कोई नया वैरियंट नहीं आता तो देश में तीसरी लहर की आशंका न के बराबर है.


 
प्रोफेसर का कहना है कि हमने अपने आंकड़ों के आधार पर पाया कि मध्य अप्रैल से मई के बीच योगी सरकार ने जो कदम उठाए वो सही साबित हुए. सरकार ने रिस्क भी लिया, जैसे उन्होंने अपनी बिजनेस एक्टविटी पूरी तरह बंद नहीं की, पूर्ण लॉकडाउन नहीं लगाया गया जबकि ऐसे स्ट्रैटजी में कोरोना तेजी से फैलना चाहिए था, लेकिन सरकार ने अच्छे से कंट्रोल किया. ये हमने अपने डेटा स्डडी में पाया. और देखिये यूपी में आज न के बराबर केस हैं.

प्रोफेसर मणीन्द्र से जब हमने पूछा कि चुनाव से ठीक पहले योगी सरकार की कोरोना नीति की वाहवाही वाली किताब छपने से विपक्ष सवाल उठाएगा तो उनका कहना है, 'मैं कोई पॉलिटिकल व्यक्ति नहीं हूं जो स्टडी में आया वही दिखाया.' उन्होंने इस समय भी केरल में बढ़ रहे केसों की तरफ इसारा करके यूपी सरकार की स्ट्रैटजी का जिक्र किया.'

आईआईटी कानपुर की टीम की ये किताब भले ही डेटा के आधार पर एकदम ठीक बैठती हो, लेकिन चुनाव से ठीक पहले योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने में लगे विपक्ष के आंकड़ों में ये फिट नहीं बैठ रही.

 

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