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बीजेपी की आंधी के बीच भी एटा नगर पालिका से निर्दलीय गांधी की जीत

मीरा गांधी की जीत पर स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पति राकेश गांधी ने पालिका अध्यक्ष रहते हुए शहर के विकास के लिए जो काम किया वही मीरा गांधी की जीत की बड़ी वजह बना. साथ ही जातीय समीकरण कुछ ऐसे रहे कि बीजेपी, कांग्रेस और सपा को नकारते हुए जनता ने एक निर्दलीय को  पालिका अध्यक्ष चुना.

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पति राकेश गांधी के साथ मीरा गांधी
पति राकेश गांधी के साथ मीरा गांधी

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में बीजेपी की आंधी के बीच भी एटा नगर पालिका सीट से निर्दलीय गांधी अपनी सीट बचाने में सफल रहीं. निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार मीरा गांधी ने बीजेपी प्रत्याशी शालिनी गुप्ता पर जीत दर्ज की है. एटा सदर सीट महिला आरक्षित थी और मीरा निवर्तमान चेयरमैन राकेश गांधी की पत्नी हैं.

कभी समाजवादी पार्टी के गढ़ माने जाने वाले एटा में बीजेपी सेंध मार चुकी है. यहां से सूबे के पूर्व सीएम कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह सांसद हैं और विधानसभा सीट पर भी बीजेपी का ही कब्जा है. बावजूद इसके ने 15365 वोट हासिल कर जीत दर्ज की है. उनकी टक्कर बीजेपी की शालिनी गुप्ता से थी, जिन्हें 15198 वोट हासिल हुए.

मीरा गांधी की जीत पर स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पति राकेश गांधी ने पालिका अध्यक्ष रहते हुए शहर के विकास के लिए जो काम किया वही मीरा गांधी की जीत की बड़ी वजह बना. साथ ही जातीय समीकरण कुछ ऐसे रहे कि बीजेपी, कांग्रेस और सपा को नकारते हुए जनता ने एक निर्दलीय को नगर पालिका अध्यक्ष चुना.

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एटा नगर पालिका की सीट पर राकेश गांधी से पहले लंबे वक्त तक बीजेपी का ही कब्जा रहा है. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के विपिन वर्मा सदर सीट से विधायक चुने गए हैं. एटा से सटे की सीट से भी बीजेपी की नूतन राठौर ने ही जीत दर्ज की है. राज्य की 16 नगर निगमों में से बीजेपी ने 14 पर जीत दर्ज की है जबकि 2 नगर निगम की सीटें बीएसपी के खाते में गईं. सपा और कांग्रेस निगमों में खाता खोलने में भी नाकाम रही. 

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