उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. डॉक्टरों के तबादलों में अनियमिता को लेकर सरकार के कार्रवाई किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान अभी नहीं हुआ है. प्रोविंशियल मेडिकल सर्विस के अनियमित तरीके से तबादला किए गए डॉक्टरों में अब तक केवल 95 का ही ट्रांसफर कैंसिल हुआ है.
कई डॉक्टरों ने डिसएबिलिटी और गंभीर बीमारी के नाम पर, तो कई ने विवाह का बहाना बनाकर ट्रांसफर कैंसिल करने की मांग की है. इस पर प्रशासन का निर्णय लिया जाना अभी बाकी है. ट्रांसफर कैंसिल होने की प्रतीक्षा कर रहे डॉक्टरों की संख्या 89 है. स्क्रीनिंग के बाद इनमें से कई का ट्रांसफर कैंसल करने या उसमें परिवर्तन करने को लेकर एक फाइल सरकार के पास भेज दी गई है.
इतना ही नहीं 6 जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारी को भी बदला जाना है. मौजूदा वक्त में मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही किसी भी ट्रांसफर को रोका या उसमें परिवर्तन किया जा सकता है. सरकार के पास डॉक्टरों के ट्रांसफर से जुड़े 200 से भी अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं.
यूपी सरकार के मेडिकल और स्वास्थ्य विभाग के प्रशासकीय निदेशक डॉ. राजगणपति आर. पहले ही इस संबंध में एक पत्र सरकार को लिख चुके हैं कि स्क्रीनिंग के बाद सामने आए 89 डॉक्टरों के मामले में केस-2-केस ट्रांसफर कैंसिल करने या उसमें बदलाव करने का फैसला हो सके. इससे पहले प्रोविंशियल मेडिकल सर्विस के 48 डॉक्टरों का गलत तरीके से किया गया ट्रांसफर कैंसिल किया जा चुका है.
मेडिकल एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय ने 30 जून को जब 313 डॉक्टरों के ट्रांसफर की लिस्ट निकाली थी, तभी से इस पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए थे. बाद में पैरामेडिकल स्टाफ के ट्रांसफर में अनियमिता सामने आईं तो ट्रांसफर की प्रक्रिया को 25 जुलाई को निलंबित कर दिया गया था.