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प्रयागराज: नौकरी न मिलने की हताशा में युवक ने लगाई फांसी, छोड़ा सुसाइड नोट

युवक का नाम विकास है और वो प्रयागराज के शिवकुटी थाना इलाके में रहता था. उसने एक किराए पर कमरा ले रखा था. बताया गया विकास लंबे समय से परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, लेकिन कभी भी उसे सफलता हाथ नहीं लगी.

नौकरी नहीं मिली, युवक ने कर लिया सुसाइड नौकरी नहीं मिली, युवक ने कर लिया सुसाइड
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नौकरी नहीं मिली, युवक ने किया सुसाइड
  • लंबे समय से मिल रहा था रिजेक्शन

कोरोना काल में बेरोजगारी और ज्यादा बढ़ गई है और नौकरी मिलना मुश्किल साबित हो रहा है. कई लोग या तो नौकरी से निकाले जा रहे हैं या फिर उन्हें नौकरी ही नहीं मिल रही. अब नौकरी ना मिलने की हताशा कई लोगों को बुरी तरह तोड़ रही है. आलम ये है कि वे अपनी जान तक देने को तैयार दिख रहे हैं. ताजा मामला यूपी के प्रयागराज का है जहां पर एक युवक ने सिर्फ इसलिए फांसी लगा ली क्योंकि उसे नौकरी नहीं मिल रही थी.

नौकरी नहीं मिली, कर लिया सुसाइड

युवक का नाम विकास है और वो प्रयागराज के शिवकुटी थाना इलाके में रहता था. उसने किराए पर एक कमरा ले रखा था. बताया गया कि विकास लंबे समय से परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, लेकिन कभी भी उसे सफलता हाथ नहीं लगी. उसने असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी के लिए भी इंटरव्यू दिया था. लेकिन वहां भी उसे रिजेक्ट कर दिया गया. ऐसे में विकास काफी हताश और परेशान था. नौकरी ना मिल पाने का दर्द उसके दिल में घर कर गया था. जब स्थिति उससे संभाली नहीं गई, उसने अपनी जान देने का फैसला ले लिया. विकास ने अपने किराए के कमरे में ही पंखे से लटक फांसी लगा ली.

पोस्टमार्टम के लिए गया शव

इस घटना के बारे में दूसरों को तब पता चला जब विकास ने लंबे समय तक अपना कमरा नहीं खोला. उसके साथी लगातार आवाज लगाते रहे, लेकिन विकास की तरफ से कोई जवाब नहीं आया. इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और फिर दरवाजा तोड़ा गया. विकास ने खुद को फांसी लगा ली थी और एक सुसाइड नोट भी छोड़ दिया था.

सुसाइड नोट में स्पष्ट लिखा था कि उसकी मौत के लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है और उसने ये कदम अपनी मर्जी से उठाया है. वहीं उसने इस बात पर भी जोर दिया कि उसे लंबे समय से नौकरी की तलाथ थी जो उसे मिल नहीं रही थी.

अभी के लिए पुलिस द्वारा विकास के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, वहीं परिवार को भी इस घटना की सूचना दे दी गई है. अब विकास जैसे और भी कई युवक हैं जो एक नौकरी पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि करीब दर्जन भर से ज्यादा प्रतियोगी छात्र नौकरी ना मिलने से हताश होकर अपनी जान दे चुके हैं.

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