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स्वामी आनंद गिरी पर ऐसे कौन से आरोप लगे, जिस वजह से उन्हें निरंजनी अखाड़े से निष्कासित किया गया?

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी से जुड़े स्वामी आनंद गिरी को निरंजनी अखाड़े से निष्काषित कर दिया गया है. आनंद गिरी संगम लेटे हनुमान मंदिर के छोटे महंत भी थे और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी के सबसे प्रिय शिष्य भी.

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स्वामी आनंद गिरी पर छेड़छाड़ के आरोप भी लगे थे. (फाइल फोटो) स्वामी आनंद गिरी पर छेड़छाड़ के आरोप भी लगे थे. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • निरंजनी अखाड़े से आनंद गिरी निष्कासित
  • संन्यासी परंपरा तोड़ने के आरोप भी लगे

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने स्वामी आनंद गिरी को निरंजनी अखाड़े से निष्कासित कर दिया है. पंचायती अखाड़े निरंजनी से जुड़े स्वामी आनंद गिरी संगम लेटे हनुमान मंदिर के छोटे महंत थे. उन्हें महंत नरेंद्र गिरी का प्रिय शिष्य भी माना जाता था. स्वामी आनंद गिरी के पास मंदिर से जुड़े कई अधिकार भी थे. लेकिन संत परंपरा का निर्वहन न करने पर इन्हें निष्काषित कर दिया गया है.

आंनद गिरी पर आरोप है कि उन्होंने संत परंपरा का निर्वहन नहीं किया और अपने परिवार से संबंध रखा. उन पर ये भी आरोप है कि उन्होंने मंदिर में आए धन को अपने परिवार में भी भेजा. 

इससे पहले 2018 में आनंद गिरी पर ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहने वाली एक विदेशी महिला ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. जिसमें वहां उन्हें पुलिस की कस्टडी में रखा गया था और फिर 26 जून तक न्यायिक हिरासत में रखा गया था.

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महंत नरेंद्र गिरी ने अपने परम शिष्य आनंद गिरी पर खुद कार्रवाई कर उन्हें निरंजनी अखाड़े से निष्कासित तो किया ही, साथ ही उन्हें मठ बाघम्बरी की गद्दी से भी हटा दिया गया है. आनंद गिरी पर संत परंपरा का निर्वहन न करना और अपने परिवार से संबंध रख उन्हें मंदिर और मठ में आए पैसों को घर भेजने का भी आरोप है. संत परंपरा के मुताबिक संन्यास लेने के बाद अपने परिवार से संबंध रखने पर अखाड़े से निष्काषित किया जाता है. 

आनंद गिरि संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के छोटे महंत भी थे. आरोप लगने के बाद पंच परमेश्वर की जांच में दोनों आरोप सही पाए जाने पर ये कार्यवाई की गई है. महंत नरेंद्र गिरि के पत्र पर पंच परमेश्वर की कार्यकारिणी की हरिद्वार में एक बैठक हुई, जिसमें आनंद गिरी के निष्कासन पर फैसला किया गया है.

 

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