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'साइकिल' पर कब्जे की लड़ाई, जानें किसका पलड़ा है भारी?

समाजवादी पार्टी में घमासान के बीच पार्टी सिंबल 'साइकिल' पर कब्जे की लड़ाई भी जारी है. मुलायम और अखिलेश गुट दोनों चुनाव आयोग के सामने अपने दस्तावेज जमा करा चुके हैं और आयोग के सामने अपनी-अपनी बातें रखने वाले हैं. चुनाव नजदीक है और सबकी निगाह इस बात पर है कि साइकिल पर किसका कब्जा होगा. आइए जानते हैं अपने-अपने दावे के पक्ष में किसके पास क्या तर्क है.

सपा में सिंबल की लड़ाई सपा में सिंबल की लड़ाई

समाजवादी पार्टी में घमासान के बीच पार्टी सिंबल 'साइकिल' पर कब्जे की लड़ाई भी जारी है. मुलायम और अखिलेश गुट दोनों चुनाव आयोग के सामने अपने दस्तावेज जमा करा चुके हैं और आयोग के सामने अपनी-अपनी बातें रखने वाले हैं. चुनाव नजदीक है और सबकी निगाह इस बात पर है कि साइकिल पर किसका कब्जा होगा. आइए जानते हैं अपने-अपने दावे के पक्ष में किसके पास क्या तर्क है.

मुलायम गुट का तर्क
-पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने कहा कि अब चुनाव चिह्न कोई भी हो, चुनाव वही प्रत्याशी लड़ेंगे जिनके टिकट उनके दस्तखत से जारी होंगे. मुलायम सिंह यादव ने दावा किया कि ये मामला उनके बाप-बेटे के बीच में है, बेटे को कुछ लोगों ने बहका दिया. उन्होंने रामगोपाल यादव का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इशारों इशारों में बहुत कुछ कह दिया.

-इससे पहले मुलायम सिंह यादव अमर सिंह और शिवपाल यादव के साथ चुनाव आयोग पहुंचे थे. चुनाव आयोग में उन्होंने पार्टी संविधान का हवाला देते हुए दावा किया कि वही हैं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिलेश कैंप के दावों में कोई दम नहीं है.

-मुलायम ने चुनाव आयोग से कहा कि पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष को हटाया नहीं जा सकता है. राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने के लिए कम से कम 30 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य है, जिसका पालन नहीं किया गया.

-मुलायम गुट ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की एक प्रक्रिया है, जिसका पालन नहीं किया गया. रामगोपाल यादव को पहले से ही उनके पद से हटा दिया गया था. लिहाजा वो कोई रेजोल्यूशन नहीं ला सकते. उनके पार्टी से जुड़ने का ऐलान सिर्फ ट्विटर के जरिए ही हुआ था, जो कि मान्य नहीं हो सकता.

-सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि अधिवेशन में मुलायम सिंह यादव को हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया था. लिहाजा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने का औचित्य ही नहीं पैदा होता. अखिलेश कैंप जिनके समर्थन का दावा कर रहा है, चुनाव आयोग उनका फिजिकल वैरिफिकेशन करवाए.

क्या दावा है अखिलेश गुट का?
-उधर अखिलेश यादव के समर्थक रामगोपाल यादव की अगुवाई में चुनाव आयोग पहुंचे तो चुनाव आयोग से चुनाव की तारीखें पास आने की बात रखते हुए इस मामले में जल्द फैसला लेने की अपील की. हालांकि जब रामगोपाल यादव से नेताजी के अखिलेश को भरमाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया पूछी गई तो वो भड़क गए.

-चुनाव आयोग ने अखिलेश कैंप के लोगों को निर्देश दिए कि पार्टी के विधायकों की जो सूची आयोग में वो दे रहे हैं, उनकी कॉपी दूसरे पक्ष यानी मुलायम सिंह यादव को दी जाए. अखिलेश खेमे की तरफ से नेताजी को उनके दिल्ली और लखनऊ दफ्तर में कागजात भेजे गए, लेकिन कहीं भी किसी ने भी ये कागजात स्वीकार नहीं किए.

-अखिलेश गुट ने बकायदा लखनऊ में मीटिंग की और विधायकों, एमएलसी से हलफनामें पर दस्तखत कराए गए कि किनके साथ हैं. इसके बाद रामगोपाल ने दावा किया कि 2212 विधायक, 68 एमएलसी और 15 सांसद उनके पाले में हैं. रामगोपाल ने कहा कि जहां अखिलेश हैं वहीं असली समाजवादी पार्टी है.

रामगोपाल पर भड़के मुलायम
चुनाव आयोग में साइकिल के लिए मची समाजवादी जंग के बीच मुलायम सिंह यादव ने बाकायदा चिट्ठी लिखकर राज्यसभा चेयरमैन को सूचित कर दिया कि चूंकि रामगोपाल को पार्टी से निकाल दिया गया है, लिहाजा उनके राज्यसभा में बैठने का अलग इंतजाम कर दिया जाए.

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