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चरम पर पहुंची सपा और यादव परिवार में जोर आजमाइश

समाजवादी पार्टी और यादव परिवार के बीच जारी जोर आजमाइश अपने चरम पर पहुंचती दिखलाई पड़ रही है. अखिलेश गुट के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने जहां कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष पद की तख्ती लगाई. वहीं शिवपाल ने मैनपुरी से जारी किया टिकट.

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समाजवादी पार्टी के भीतर की खेमेबाजी और जोर आजमाइश अपने सर्वकालिक चरम पर पहुंच गई दिखती है. इस क्रम में जहां अखिलेश यादव गुट के प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी दफ्तर में अपने नाम की तख्ती लगा ली है. वहीं शिवपाल यादव ने उम्मीदवारों के नाम जारी कर दिए हैं.

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि मुलायम खेमे के प्रदेश अध्यक्ष जहां शिवपाल यादव हैं. तो वहीं अखिलेश खेमें के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम हैं. पिता-पुत्र के इस दंगल में चुनाव चिन्ह को लेकर सस्पेंस भले ही बरकरार हो लेकिन उनके अध्यक्षों के बीच रार अब खुलकर दिखने लगी है. नरेश उत्तम को अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अपना प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. उन्होंने नए साल में मकरसंक्रांति के दिन अपने नाम की तख्ती प्रदेश कार्यालय में लटका दी. वहीं शाम होते ही शिवपाल यादव ने पार्टी के लेटर हेड पर मैनपुरी से एक उम्मीदवार के नाम का एलान कर दिया.

पिता-पुत्र के साथ दूसरे नेता भी हुए शामिल
एक तरफ जहां अखिलेश गुट के प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदेश कार्यालय में अपने नाम को सार्वजनिक किया. तो वहीं दूसरे ने कागज पर अपनी ताकत दिखा दी. साफ है समाजवादी पार्टी में दबदबे और कब्जे को लेकर ये जोर आजमाइश सिर्फ पिता-पुत्र तक सीमित नही है बल्कि कैडरों तक फैल चुकी है. एक तरफ जहां मुलायम खेमा किसी लड़ाई में हारते हुए दिखना नहीं चाहता. वहीं अखिलेश खेमा अपनी दावेदारी पुख्ता करने की हर कोशिश करने मे जुट गया है.

नरेश उत्तम मुलायम से मिले
नरेश उत्तम ने अपने नाम की तख्ती टांगने के बाद सीधे मुलायम सिंह की कोठी 5 विक्रमादित्य मार्ग का रुख किया. सूत्रों के मुताबिक नरेश उत्तम को मुलायम सिंह ने तलब किया था और गायत्री प्रजापति उन्हें साथ लेकर मुलायम की कोठी पर गए थे. बाहर निकलकर नरेश उत्तम ने कहा कि मकरसंक्रांति के दिन वो आशीर्वाद लेने गए थे. हालांकि पार्टी दफ्तर पर कब्जे की इस जंग में कोई पीछे नहीं दिखना चाहता. जैसे ही नरेश उत्तम मुलायम सिंह से मिलकर बाहर आए. शिवपाल यादव ने पार्टी के लेटरहेड पर मैनपुरी से सोवरन सिंह यादव जो कि वर्तमान विधायक भी हैं उनका नाम कैंडिडेट के तौर पर जारी कर दिया.

सबकी नजरें साइकिल के निशान पर
जोर आजमाइश के बीच तमाम नजरें अब इसपर टिकी हैं कि चुनाव आयोग साइकिल निशान को लेकर किसके हक में फैसला करता है. जिसके हक मे साइकिल जाएगी दफ्तर पर उसका दावा मजबूत होगा लेकिन अगर ये सिंबल फ्रीज हो गया तो दफ्तर पर कब्जे की जंग और भी मोड़ ले सकती है.



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