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यूपी में CM उम्मीदवारी पर राहुल गांधी बोले- मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता

यूपी में कांग्रेस के प्रचार की कमान संभालने वाले प्रशांत किशोर यानी पीके ने प्लान दिया है कि मायावती और अखिलेश के सामने कांग्रेस की तरफ से एक बड़ा और भरोसेमंद चेहरा होना जरूरी है.

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर चल रही अटकलों पर कुछ भी बोलने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसी खबरें चलाते हैं वही जानें कि क्या होगा.

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, 'मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं है. जो लोग ऐसी खबरें चलाते हैं, वही जाने कि क्या होगा.' बता दें कि इससे पहले खबर आई कि यूपी में कांग्रेस के प्रचार की कमान संभालने वाले प्रशांत किशोर यानी पीके ने मायावती और अखिलेश के सामने कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी को खड़ा करने का मन बनाया है. यही नहीं, उन्होंने इस बारे में पूरा प्लान पार्टी आलाकमान को भी सौंप दी है.

बड़ा और भरोसेमंद चेहरा जरूरी
सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत का मानना है कि अगर राहुल गांधी खुद सीएम का चेहरा बनें और कांग्रेस यूपी जीते तो 2019 की जीत तय हो जाएगी. कांग्रेस यूपी में 2017 के चुनाव को जीतेगी तो मोदी सरकार आखिरी 2 सालों के लिए लेम-डक सरकार बनकर रह जाएगी. बतौर पीके, कांग्रेस को यूपी में किसी के साथ गठबंधन की जरूरत नहीं है. अगर राहुल नहीं तो फिर प्रियंका पर दांव लगाना होगा. 2019 तक इंतजार सही नहीं रहेगा.

ब्राह्मणों की घर वापसी चाहते हैं पीके
सूत्र बताते हैं कि पीके की रणनीति अगड़ी जाति, मुस्लिम और पासी का समीकरण बनाने की है. बीजेपी पहले ही ओबीसी पर दांव लगा चुकी है. इसीलिए वो लगातार बड़े ब्राह्मण चेहरे पर जोर दे रहे हैं. रणनीति के तहत अगर ब्राह्मणों की कांग्रेस में घर घर वापसी होती है, आधा राजपूत मुड़ता है तो मुस्लिम भी कांग्रेस के पाले में आ सकते हैं. दरअसल, पीके यूपी चुनाव में कांग्रेस को आर-पार की लड़ाई लड़ने की सलाह दे रहे हैं और पूरी ताकत झोंकने को कह रहे हैं. इसके लिए वो बिहार की तर्ज पर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की बीजेपी की सियासत से भी निपटने को तैयार हैं. पीके के करीबी मानते हैं कि बड़ा चुनाव जीतकर ही राहुल और कांग्रेस दोबारा खोयी शान वापस पा सकते हैं.

सीटों का समीकरण
सूत्रों का कहना है कि पीके के मुताबिक हालिया सियासी नतीजों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि कांग्रेस मजबूत चेहरे के साथ विकल्प बने और जीतती हुई दिखे तो 200 का आंकड़ा पार कर यूपी में सरकार बना सकती है या फिर पहले की तरह लड़े तो 28 की जगह 20 पर भी सिमट सकती है. 28 से 60, 70 की उम्मीद पूरी होना नामुमकिन जैसा है.

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