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केंद्र की योजनाओं को लपक रहे हैं CM योगी, दूसरे राज्य मल रहे हैं हाथ

मिसाल के तौर पर केंद्र सरकार ने इस बजट में आर्मी मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए दो कॉरिडोर का प्रावधान रखा था, वित्त मंत्री का बजट भाषण सुनते ही योगी आदित्यनाथ दिल्ली के लिए निकल पड़े और बुंदेलखंड कॉरिडोर को आर्मी मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए ले लिया.

यूपी के CM योगी आदित्यनाथ यूपी के CM योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं को लपकने की भूख बढ़ती ही जा रही है. केंद्र सरकार ने ज्यों कुछ ऐलान किया नहीं कि सीएम योगी निकल पड़ते हैं दिल्ली.. और उत्तर प्रदेश के लिए उस योजना को येन केन प्रकारेण लपककर ले आते हैं.

चौंकिए मत यह खुलासा खुद योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार रात लखनऊ में चुनिंदा पत्रकारों के साथ हुई एक अनौपचारिक बातचीत में किया, मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी नजर हर वक्त दिल्ली में मोदी सरकार में हो रही गतिविधियों पर लगी रहती है और जैसे ही मोदी सरकार किसी योजना का प्लान करती वो उसे लपकने में अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं.

मिसाल के तौर पर केंद्र सरकार ने इस बजट में आर्मी मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए दो कॉरिडोर का प्रावधान रखा था, वित्त मंत्री का बजट भाषण सुनते ही योगी आदित्यनाथ दिल्ली के लिए निकल पड़े और बुंदेलखंड कॉरिडोर को आर्मी मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए ले लिया.

इसी बजट में जब वित्त मंत्री ने "रेडीमेड गारमेंट्स हब" बनाने का ऐलान किया तो योगी आदित्यनाथ उसे भी लेने निकल पड़े और केंद्र सरकार जिसे झारखंड में लाना चाहती थी उसे भी वह उत्तर प्रदेश ले आए.

इसी साल के बजट में जब मोदी सरकार ने कई म्यूजियम के लिए प्रस्ताव रखा तो योगी ने अयोध्या, इलाहाबाद और गोरखपुर के लिए तीन म्यूजियम लपक लिए. इलाहाबाद में कुंभ को लेकर एक म्यूजियम बनेगा, जबकि अयोध्या में राम और रामायण पर म्यूजियम का निर्माण होगा.

इसी तरह केंद्रीय बजट में उन्होंने उत्तर प्रदेश के लिए कई मेडिकल कॉलेज स्वीकृत करवा लिए.

बिजली के क्षेत्र में भी योजनाएं लपकने में योगी आदित्यनाथ आगे हैं, यूपी में अबतक अंधेरे में जी रहे 32 हजार मजरे में से 20 हजार मजरों में विद्युतीकरण का कमिटमेंट भी पीएम की मुलाकात के पहले बिजली मंत्री से करवा लिया.

योगी आदित्यनाथ इन दिनों जिस प्रोजेक्ट के लिए प्रधानमंत्री से मिलते हैं उसी प्रोजेक्ट के लिए उनके मंत्री, विभाग के मंत्री से मिलते हैं और उस विभाग के सचिव दिल्ली में उस विभाग के सचिव से मिलते हैं. योजनाओं को लपकने में योगी आदित्यनाथ का यह ट्रिक काम कर रहा है. यही वजह है कि दूसरे राज्य जब तक सोचते हैं तब तक योगी उस योजना को लेकर उत्तर प्रदेश और लखनऊ वापस पहुंच चुके होते हैं.

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