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HC से बेल, SC ने फिर भेजा जेल... लखीमपुर हिंसा से आशीष मिश्र के सरेंडर तक का पूरा घटनाक्रम

लखीमपुर हिंसा से लेकर आशीष मिश्र को जेल भेजे जाने, हाईकोर्ट से बेल मिलने और फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर से जेल भेजे जाने तक कब क्या हुआ?

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आशीष मिश्रा (फाइल फोटो) आशीष मिश्रा (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अजय मिश्र के बेटे आशीष ने सीजेएम कोर्ट में किया सरेंडर
  • लखीमपुर के तिकुनिया में हिंसा का मुख्य आरोपी है आशीष

लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में जमानत पर चल रहे मुख्य आरोपी आशीष मिश्र ने लखीमपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. आशीष ने रविवार को सीजेएम कोर्ट पहुंचकर सरेंडर कर दिया जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

आशीष मिश्र की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल को आशीष की जमानत को लेकर फैसला सुनाते हुए उसे सात दिन के अंदर सरेंडर करने के निर्देश दिए थे. सु्प्रीम कोर्ट की ओर से दिया गया सात दिन का वक्त 25 अप्रैल को समाप्त हो रहा था. आशीष ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली मोहलत समाप्त होने के एक दिन पहले ही सरेंडर कर दिया.

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देश के गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष को सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद फिर से जेल जाना पड़ा है. आशीष के मसले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और यूपी सरकार की काफी फजीहत हुई. अब, जबकि जमानत रद्द होने के बाद आशीष मिश्र को पुलिस ने फिर से जेल भेज दिया है, आइए नजर डालते हैं पूरे घटनाक्रम पर...

कब क्या हुआ?

3 अक्टूबर 2021- लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान सड़क पर उतर प्रदर्शन कर रहे थे. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को तब बनबीरपुर गांव जाने वाले थे. नए कृषि कानूनों को लेकर डिप्टी सीएम के विरोध में किसान सड़क पर उतर आए थे. इस दौरान किसानों को गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी की तेज रफ्तार महिंद्रा थार ने रौंद दिया जिससे चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी. घटना के बाद आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने थार के चालक समेत तीन लोगों को पीट-पीटकर मार डाला था. चश्मदीदों ने दावा किया था कि मंत्री अजय मिश्र का बेटा आशीष भी एक वाहन में सवार था.

4 अक्टूबर 2021- किसानों ने तिकुनिया थाने में तहरीर देकर घटना को पूर्व नियोजित बताते हुए केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र और उनके बेटे आशीष मिश्रा पर साजिश रचने का आरोप लगाया था. किसानों की ओर से आशीष मिश्र समेत 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश की शिकायत दर्ज कराई गई थी.

9 अक्टूबर 2021- किसानों ने इस घटना की तुलना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए जलियावाला बाग हत्याकांड से करते हुए किसान आंदोलन को तोड़ने के लिए बड़ी साजिश का हिस्सा बताया. किसान संगठनों ने इस घटना को दहशत फैलाने की साजिश भी करार दिया था. किसानों के आरोप खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र और आशीष पूछताछ से बचते रहे. हंगामा हुआ तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की आलोचना की और घटना के 5 दिन बाद तक उठाए गए कदमों को लेकर असंतोष व्यक्त किया. सुप्रीम कोर्ट ने आशीष की गिरफ्तारी न होने को लेकर भी सवाल उठाए और मामले की जांच के लिए यूपी सरकार की ओर से गठित एसआईटी को भी फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की फजीहत के बाद आशीष एसआईटी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हुआ.

10 अक्टूबर 2021- एसआईटी ने 10 अक्टूबर को मैराथन पूछताछ के बाद आशीष मिश्र को गिरफ्तार कर लिया. 

12 अक्टूबर 2021- आशीष मिश्र को लेकर एसआईटी की टीम घटना स्थल पर पहुंची और क्राइम सीन रीक्रिएट किया. मामले की जांच के लिए पहुंची फॉरेंसिक टीम ने मौके पर एक गाड़ी से दो खाली कारतूस भी बरामद किए. आशीष अपने वाहन से मिले खाली कारतूस को लेकर कोई जानकारी नहीं दे सका. किसानों ने आशीष पर गोली चलाने का आरोप लगाया था.

15 अक्टूबर 2021- पुलिस ने आशीष मिश्र की राइफल और पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास के भतीजे की पिस्टल, रिपीटर गन समेत चार हथियार बरामद किए. पुलिस ने 15 अक्टूबर तक 20 में से 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

16 अक्टूबर 2021- लखीमपुर हिंसा में मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के भाई पवन कश्यप ने एसआईटी रिपोर्ट के हवाले से दावा किया कि उनके भाई को किसानों ने नहीं मारा बल्कि कार ने रौंदा. पवन ने इसे लेकर पुलिस को शिकायत भी दी लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई.

15 नवंबर 2021-  सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को ये आदेश दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एसआईटी को अपग्रेड करें और सही जांच के लिए एक सेवानिवृत्त जज को भी इसमें शामिल किया जाए.

25 नवंबर 2021- जांच के लिए गठित की गई एसआईटी में आईपीएस अधिकारी एसबी शिराडकर, पद्मजा चौहान, प्रीतिंदर सिंह को भी शामिल किया गया. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश राकेश कुमार जैन भी एसआईटी का हिस्सा बनाए गए.

15 दिसंबर 2021- पुलिस ने कोर्ट में किसानों को रौंदने की घटना को लेकर कहा कि ये लापरवाही नहीं, साजिश थी. 

3 जनवरी 2022- एसआईटी ने आशीष मिश्रा समेत 14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर किया. 5000 पेज की इस चार्जशीट में पुलिस ने कहा कि आशीष घटनास्थल पर मौजूद था और बैलेस्टिक रिपोर्ट में भी रिवॉल्वर से फायरिंग की पुष्टि हुई है.

10 फरवरी 2022- आशीष मिश्र की जमानत अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आशीष मिश्र को जमानत दे दी.

16 फरवरी 2022- आशीष मिश्र जमानत पर जेल से रिहा.

15 मार्च 2022-  आशीष मिश्र को जमानत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एनवी रमन्ना की बेंच ने यूपी सरकार से जवाब मांगा.

30 मार्च 2022- सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एसआईटी ने रिपोर्ट दी जिसमें कहा गया कि यूपी सरकार से दो बार हाईकोर्ट के जमानत के फैसले के खिलाफ आशीष मिश्रा को मिली जमानत रद्द करने के लिए याचिका दायर करने की सिफारिश करते हुए दो बार पत्र लिखा था लेकिन यूपी सरकार नहीं मानी.

18 अप्रैल 2022- सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्र की जमानत रद्द करते हुए एक हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया.

24 अप्रैल 2022- आशीष मिश्र ने लखीमपुर की सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया. पुलिस ने आशीष मिश्र को भेजा जेल.

 

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