500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक अजीब मामला सामने आया है. यहां एक खाता धारक के अकाउंट में अचानक 21 लाख 79 हजार 702 रुपये आ गए. हालांकि, खाता धारक खुश होने के बजाए दुखी है और बैंक के चक्कर काट रहा है.
क्या है पूरा मामला?
जिले के दिलीपपुर इलाके में स्टेट बैंक की शाखा है, जहां विश्वजीत शुक्ला नाम के शख्स का कई सालों से खाता है. वो पेशे से इंशोरेंस एजेंट हैं. विश्वजीत को जब 500 और 1000 के नोटों की बंदी के बारे में पता चला, तो वो बैंक में जमा अपनी 14000 की रकम की एंट्री पासबुक पर करवाने पहुंचे, लेकिन जब उन्होंने एंट्री करवाई, तो उनके अकाउंट में 21 लाख 79 हजार 702 रुपये ई-पेमेंट के जरिए up state co के अकाउंट से ट्रांसफर मिले.
बैंक के चक्कर काट रहे हैं विश्वजीत
विश्वजीत के अकाउंट में ये पैसा कैसे आएं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. ऐसे में परेशान होकर वह बैंक के चक्कर काट रहे हैं. वहीं, बैंक के मुख्य प्रबंधक इतने बड़े मामले को पता करने की बजाय अन्य ब्रांच का मामला बता कर टाल मटोल कर रहे हैं. मुख्य प्रबंधक एन सी दुबे का कहना है कि इस मामले में खाता धारक को दिलीपपुर ब्रांच में संपर्क करना पड़ेगा.
गंगा में बहते मिले 500-1000 के नोट
प्रधानमंत्री की काले धन के खिलाफ शुरू हुई सर्जिकल स्ट्राइक का असर देश भर में दिखने लगा हैं. कालधन जमा कर रखे लोग कहीं पैसे को लावारिस फेंक रहे हैं, तो कहीं नोटों को जलाया जा रहा है. ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश में मिर्ज़ापुर में सामने आया, जहां 500 व 1000 के नोट गंगा नदी में बहते हुए मिले.
बरेली में जलाए गए थे नोट
बरेली के परसाखेड़ा स्थित बीएल एग्रो कम्पाउंड के बाहर का सड़क किनारे बीएल एग्रो फैक्ट्री के बाहर 9 तारीख को भारी तादात में कटे हुए नोट पड़े मिले थे. बताया जा रहा है कि सुबह से यहां बड़ी तादात में कूड़े के साथ नोटों की कतरन पड़ी थी, जिनमें आग लगाने की कोशिश भी की गई. इसकी सूचना मिलते ही मौके पर भीड़ जमा हो गई. ये नोट जिले के बड़े उद्योगपति घनश्याम खंडेलवाल के बताये गए थे.