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हापुड़ : नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत घोषित पहले 'गंगा ग्राम' में 7 साल में भी नहीं बन सका घाट

गंगा ग्राम घोषित होने के बाद पूठ में कई विकास योजनाओं का ऐलान किया गया था. यहां पर आरती घाट का निर्माण भी पक्का किया जाना था. 30 मीटर लंबे और 25 मीटर चौड़े आरती प्लेटफार्म पर 2.25 करोड़ खर्च किए जाने हैं. लेकिन घाट निर्माण का कार्य इतनी धीमी गति से चल रहा है कि 7 साल होने जाने के बावजूद अभी यह पूरा नहीं हो सका है.

 हापुड़ जिले के पुष्पावती पूठ को पहला गंगा ग्राम घोषित किया था (फोटो- आजतक) हापुड़ जिले के पुष्पावती पूठ को पहला गंगा ग्राम घोषित किया था (फोटो- आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गढ़मुक्तेश्वर में मौजूद इस गांव में पाए जाते हैं महाभारत काल के साक्ष्य
  • कहा जाता है कि यहीं गुरु द्रोणाचार्य का गुरुकुल स्थित था

2014 में देश की सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने गंगा को साफ करने के उद्देश्य से नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू किया था. इस प्रोजेक्ट के तहत हापुड़ जिले के पुष्पावती पूठ को पहला गंगा ग्राम घोषित किया था. पूठ काफी ऐतिहासिक गांव माना जाता है. कहा जाता है कि महाभारत काल में इसका नाम पुष्पावती था. तीर्थ नगरी गढ़मुक्तेश्वर में मौजूद इस गांव में महाभारत काल के साक्ष्य पाए जाते हैं. लेकिन यह दुर्भाग्य है कि इस गांव को पहला गंगा ग्राम घोषित किए जाने के बावजूद यहां 7 साल में घाट का निर्माण नहीं हो सका है. 

गंगा ग्राम घोषित होने के बाद पूठ में कई विकास योजनाओं का ऐलान किया गया था. यहां पर आरती घाट का निर्माण भी पक्का किया जाना था. 30 मीटर लंबे और 25 मीटर चौड़े आरती प्लेटफार्म पर 2.25 करोड़ खर्च किए जाने हैं. लेकिन घाट निर्माण का कार्य इतनी धीमी गति से चल रहा है कि 7 साल होने जाने के बावजूद अभी यह पूरा नहीं हो सका है. 

क्या कहते हैं विधायक?
गढ़मुक्तेश्वर से भाजपा विधायक कमल मलिक ने कहा, पुष्पावती पूठ में इस समय घाट बनाने का कार्य चल रहा है, बरसात का मौसम है, जिससे दिक्कत होती है, इसी कारण कार्य में थोड़ी देरी हो रही है. उन्होंने कहा, यह नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत देश का पहला गंगा ग्राम है, विकास के अतिरिक्त प्रदेश सरकार ने यहां 26 किलोमीटर की एक सड़क का निर्माण भी कराया है, साथ ही यहां से केवल 4 किलोमीटर दूर गंगा एक्सप्रेस वे भी निकल रहा है. 

उन्होंने कहा, महाभारत काल के बाद यहां की दिव्यता व भव्यता कहीं छिप गयी थी, लेकिन महाभारत का यही वह स्थान है, जहां गुरु द्रोणाचार्य का गुरुकुल था, यहीं पर कौरव और पांडव राजकुमारों को शिक्षा देने का कार्य किया जाता था, और पहले इस गांव का नाम पुष्पावती हुआ करता था. 

'यहां अभी भी गुरुकुल परंपरा चली आ रही'
पूठ गुरुकुल के मोहनदास तिवारी ने बताया कि यह महाभारत कालीन पुष्पावती धाम है, यहां गुरु द्रोणाचार्य ने कौरव और पांडवों के बालकों को शिक्षा दी थी, तभी से यहां गुरुकुल परंपरा चली आ रही है. आचार्य ने बताया कि पुराणों में इसका उल्लेख है. पहले यहां शहर था और घनी बस्ती हुआ करती थी. इसका एक साक्ष्य यह भी है कि यहां अभी भी हर 100 मीटर पर एक कुआं नजर आता है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि जरूर यहां बड़ी जनसंख्या कभी रही होगी. आचार्य ने बताया कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट से इस गांव को जोड़ने के बाद काफी सुविधाएं यहां मिली हैं और लोगों को जानकारी होने लगी है कि हमारे प्रदेश में ऐसी जगह है.


 

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