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ज्ञानवापी केस: वजू खाने में मिले 'शिवलिंग' पर सर्वे में शामिल फोटोग्राफर के कई बड़े खुलासे

ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे के दौरान मौजूद फोटोग्राफर विभाष दुबे ने आजतक से बातचीत में कहा कि शिवलिंग की तरह से जो स्ट्रक्चर मिला, उस पर कछुए के स्किन जैसे निशान बने हुए थे. इसके साथ ही विभाष दुबे ने कई खुलासे किए, यहां पढ़िए-

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ज्ञानवापी मस्जिद
ज्ञानवापी मस्जिद
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ज्ञानवापी के सर्वे के दौरान मौजूद थे विभाष दुबे
  • बोले- मस्जिद में मिली सनातन धर्म की कलाकृतियां

वाराणसी के ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले के सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में पेश हो चुकी है. सर्वे के दौरान मौजूद फोटोग्राफर विभाष दुबे ने आजतक से बातचीत की और इस दौरान कई खुलासे भी किए. विभाष दुबे ने सर्वे के दौरान की जानकारी तो दे ही. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वजूखाने में मिले 'शिवलिंग' पर कछुए की स्किन जैसे निशान बने हुए थे.

फोटोग्राफर विभास दुबे ने बताया कि उन लोगों को वहां पर जो कुछ भी दिखाई दिया हुआ, उनके लिए एक सब्जेक्ट मात्र था, जिसकी इन लोगों ने तस्वीरें ली, विभास ने बताया कि उस दौरान कमिश्नर ने दोनों पक्षों से बारी-बारी पूछा कि आप बताइए कि यह क्या है? हिंदू पक्ष ने उसे शिवलिंग बताया वही मुस्लिम पक्ष ने उसे फव्वारा बताया.

विभाष दुबे ने आगे बताया, 'वह चाहे शिवलिंग हो या फव्वारा हो लेकिन उसके नीचे का व्यास बड़ा था. बताया गया था कि वह काला पत्थर है, वह पत्थर कछुए की स्किन की तरह से दिखाई दे रहा था.' विभाष दुबे ने आगे बताया कि हो सकता है ज्यादा दिन तक पानी में रहने से या यह भी हो सकता है कि उस पत्थर की खासियत हो.

फोटोग्राफर विभाष दुबे ने कहा कि स्ट्रक्चर कछुए की स्किन जैसा दिखाई दे रहा था, हो सकता हो कि काले पत्थर का यही स्वभाव होगीस पानी में बहुत दिनों तक डूबने की वजह से उस तरह का दिखाई दे रहा हो. विभाष दुबे ने आगे कहा कि वह कोई हैंडमेड नहीं था बल्कि उसका स्ट्रक्चर ही वैसा था.

विभाष दुबे ने बताया कि दीवारों पर सनातन धर्म से संबंधित प्रतीक चिन्ह दिखाई दे रहे थे, त्रिशूल भी दिखाई दिया, स्वस्तिक भी दिखाई दिए. अंदर और बाहर हर तरफ दिखाई दे रहा था. विभाष दुबे ने बताया कि इस्लाम धर्म से संबंधित किसी भी तरह का प्रतीक चिन्ह उनको दिखाई नहीं दिया, हो सकता है कुछ लिखा गया हो लेकिन हम लोगों को समझ में नहीं आया.

विभाष दुबे ने बताया कि सर्वे के दौरान 32-32GB की साथ और 64GB की एक मेमोरी कार्ड का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने बताया कि रोज मेमोरी कार्ड को चेक किया जाता था और नई मेमोरी कार्ड लगाई जाती थी. फोटोग्राफी के बाद उसको अधिकारियों के पास जमा कर दिया जाता था.

विभाष ने बताया कि श्रृंगार गौरी को ले करके भी हमने जो पहले तस्वीरें देखी थी, उसी तरह का स्ट्रक्चर मिला. उन्होंने बताया कि तहखाने में मगरमच्छ की आकृति भी मिली, दीवारों पर कई तरह की लिपियां भी मिली जो हम लोगों को समझ में नहीं आ रही थी, जब हम लोगों ने गुंबद को देखा तो गुंबद के अंदर गुंबर बना हुआ था.

तहखाने पर विभाष दुबे ने बताया कि अंदर कई तहखाने थे. तहखने में भी शेर वगैरह की आकृतियां बनी हुई थी. साथ ही साथ श्लोक भी लिखे हुए थे. दक्षिण के तरफ के तहखाने में श्लोक लिखे हुए दिखाई दिए. कुछ श्लोक चार पांच लाइनों से थे कई जगह तस्वीरें भी उकेरी हुई थी.

 

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