उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत के बाद के एक तरफ तमाम राजनीतिक दलों की टिप्पणी जारी है, तो दूसरी तरफ राज्य सरकार मामले में अपना तर्क दे रही है. लेकिन अस्पताल में जिन बच्चों की मौत हुई, उनके परिवार में मातम छाया हुआ है. 12 साल की वंदना के स्कूल में आज छुट्टी है, ये छुट्टी किसी त्योहार के लिए नहीं बल्की इसलिए कि उनकी होशियार छात्रा अब इस दुनिया में नहीं रही.
अस्पताल की लापरवाही से गई जान
गुरुवार को जब वह अस्पताल गई तो अपने दादी के लिए पकोड़े लाने का वादा करके गई मगर बीआरडी अस्पताल में भर्ती होने के बाद वंदना ने दुनिया को अलविदा कह दिया. उसके परिवार वालों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और ऑक्सीजन सप्लाई खत्म होने से उनकी नन्हीं जान उनसे रूठ कर चली गई. अपने भाई को राखी बांध के उसकी रक्षा करने की तो कसम उसने खाई लेकिन अपनी रक्षा उसने शायद भगवान पर छोड़ दी. यही वजह है कि भगवान ने उसे अपने पास बुला लिया. 12 साल की वंदना हमेशा के लिए अपने भाई बहन को छोड़ कर चली गई. शायद वंदना को भी नहीं पता था कि अस्पताल का वो सफर उसका आखिरी सफर होगा. वरना वह अपने दादी के लिए पकौड़े लाने का वादा नहीं करती.
गोरखपुर से कुछ दूर बेलीपार गांव के एक छोटे से कस्बे में रहने वाली वंदना अपने घर की लाडली थी. गुरुवार को वंदना को जब बुखार चढ़ा तो उसके बाबा उसको टेंपो स्टैंड तक लेकर गए, तब वंदना हंसते-खेलते अपने बाबा को बोलते हुए गई कि वो बाजार से पकौड़े लाएगी, पर बीआरडी अस्पताल पहुंचते ही वंदना को आईसीयू में भर्ती कर दिया गया. वंदना के चाचा उमेश ने बताया, 'मैं वंदना के साथ बैठा था, डॉक्टर ने बोला कि खून की कमी है तो खून मैंने दिया. उसके बाद बाहर से दवाई लेकर आया. फिर डॉक्टर ने बोला कि ऑक्सीजन खराब हो गया है, इसलिए तुम ये पंप लो और इससे पंप करते रहो. जब सुबह हुई तो एकाएक वंदना ना कुछ बोल रही थी, ना कुछ कह रही थी.
डॉक्टर ने नहीं दिया कोई पर्चा
परिजनों का आरोप है कि शुक्रवार की सुबह सब कुछ ठीक नहीं था. ना वंदना कुछ बोल रही थी और आसपास अफरा-तफरी मची थी. एकाएक डॉक्टरों की फौज आईसीयू पहुंची. फिर डॉक्टर ने वंदना के चाचा को किनारे ले जाकर बोला कि बिना शोर-शराबे के वह वंदना के मृत शरीर को अस्पताल से ले जाए. डॉक्टर ने तो उसे वंदना के इलाज का एक भी पर्चा भी नहीं दिया. यही नहीं डॉक्टर ने कहा कि वह पीछे के दरवाजे से जाए और बिल्कुल शोर ना करे.
वंदना के गरीब परिवार के पास कोई धन-दौलत थी तो वह उनकी बेटी थी जिस पर उनको बेहद गर्व था. उसके पापा मजदूर हैं, मगर अपने बच्चों को पालने में उनके माथे पर कभी भी शिकन नहीं आई. आज जब उनकी बेटी उनसे छिन गई है तो वह चाहते हैं कि गुनहगारों को सजा मिले.