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वाराणसी: गंगा दशहरा पर सदियों पुरानी परंपरा टूटी, घाटों पर पसरा सन्नाटा

गंगा दशहरा के दिन गंगा घाटों पर हजारों लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ा करती थी और अलग-अलग घाटों पर भव्य गंगा पूजन और आरती के आयोजन हुआ करते थे, लेकिन अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है.

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(Photo: aajtak)
(Photo: aajtak)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गंगा-पूजन और स्नान की परंपरा को कोरोना वायरस ने तोड़ दिया
  • लॉकडाउन की वजह से गंगा घाटों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा

कोरोना महामारी के चलते देश भर में लॉकडाउन लगा हुआ है. सरकार धीरे-धीरे ढील भी दे रही है. इसके बावजूद भी देश के कई हिस्सों में सोशल डिस्टेंसिंग के कारण कई कार्यक्रम और प्रयोजन नहीं हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी इसी के चलते सदियों पुरानी एक परंपरा टूट गई. 

दरअसल, ऐसा माना जाता है कि भगीरथ अपने पूर्वजों को तारने के लिए आज ही के दिन मां गंगा की कठिन तपस्या करके उनको धरती पर लाए थे. तभी से गंगा दशहरा मनाने की परंपरा चली आ रही है, लेकिन सदियों से चली आ रही गंगा पूजन और स्नान की परंपरा को कोरोना वायरस ने तोड़ दिया.

वाराणसी में धारा 144 के तहत गंगा स्नान और धार्मिक आयोजनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया जिसके चलते वाराणसी के 84 घाटों पर सन्नाटा पसरा हुआ है. गंगा दशहरा के दिन गंगा घाटों पर हजारों लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ा करती थी और अलग-अलग घाटों पर भव्य गंगा पूजन और आरती के आयोजन हुआ करते थे.

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जिला प्रशासन की ओर से पहले ही धारा 144 का हवाला देते हुए गंगा स्नान और धार्मिक आयोजनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था. इक्का-दुक्का आने वाले लोगों को पुलिस तड़के सुबह से ही भगाती रही. जगह-जगह सड़कों पर गंगा की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग करके भी लोगों को रोका जा रहा था.

हालांकि गंगा दशहरा के विशेष अवसर पर रोजाना होने वाली एकल गंगा आरती के जरिए ही मां गंगा की पूजा हुई और मां गंगा से यह प्रार्थना की गई की मां कोरोना जैसी महामारी दूर करके वापस जनजीवन को सामान्य करें.

 

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