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लखनऊ: एम्बुलेंस में तड़पता रहा मरीज, इलाज नहीं मिलने के कारण गई जान

उत्तर प्रदेश में कोरोना से मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. राजधानी लखनऊ से लेकर वाराणसी तक सभी जगह बेबसी का मंजर दिखाई दे रहा है. अस्पतालों में न बेड है और न ऑक्सीजन-दवा.

कानपुर शवदाह गृह की तस्वीर कानपुर शवदाह गृह की तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लखनऊ के अस्पताल के बाहर मरीज की मौत
  • अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को नहीं किया एडमिट

उत्तर प्रदेश में कोरोना की रफ्तार बेलगाम हो गई है और राजधानी लखनऊ से लेकर वाराणसी तक सभी जगह बेबसी का मंजर दिखाई दे रहा है. अस्पतालों में न बेड है और न ऑक्सीजन-दवा. गुरुवार को लखनऊ में बेड न मिलने के कारण एक और कोरोना मरीज की मौत हो गई. उसके परिजन अस्पताल के बाहर रोते-बिलखते रहे. पूरी घटना का वीडियो वायरल हो रहा है.

जानकारी के मुताबिक, लखनऊ के 61 वर्षीय निर्मल की तबीयत काफी खराब हो गई थी. कोविड कमांड सेंटर ने मरीज को करियर मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए कहा, लेकिन वहां अस्पताल ने उन्हें एडमिट नहीं किया. अस्पताल सीएमओ का रेफरल लेटर मांगता रहा और परिजन मरीज को एडमिट करने की भीख. घंटों इंतजार के बाद मरीज की मौत हो गई.

गुरुवार को ही लखनऊ में कोरोना से कब्र खोदने वाले व्यक्ति की मौत हो गई. लखनऊ डालीगंज स्थित कब्रिस्तान में काम करने वाले बाबू की कोरोना के कारण मौत हो गई. उसे इलाज नहीं मिल पाया. पिछले कुछ दिनों से बाबू लगातार कब्र खोद रहा है और कोरोना से जान गंवाने वालों को दफना रहा है. 

डालीगंज कब्रिस्तान के संचालक उस्मान का कहना है कि आमतौर पर बाबू रोजाना एक कब्र खोदता था, लेकिन कोरोना काल में वह रोजाना 6 कब्र खोद रहा था. उस्मान का कहना है कि जो शव अस्पताल से आते हैं, वह सील होते हैं, लेकिन घर से आने वाले शवों की जांच नहीं होती है, ऐसे में बाबू किसी शव से संक्रमित हुआ होगा.

उस्मान का कहना है कि बाबू को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाया, इस वजह से उसकी मौत हो गई. आमतौर पर डालीगंज स्थित कब्रिस्तान में हर रोज एक कब्र खोदी जाती थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के दौरान 6 से 7 कब्र खोदी जाती है. कब्र खुदाई की मजदूरी भी 800 कर दी गई थी.

 

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