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AIIMS गोरखपुर के लिए क्रेडिट की होड़, सीएम अखिलेश ने पेश किया दावा

गोरखपुर के लिए ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की स्थापना के क्रेडिट के लिए सीएम अखिलेश यादव ने भी दावेदारी कर दी है. हालांकि उन्होंने कहा है कि यह जनता को तय करना है.

अखिलेश ने कहा कि एम्स के लिए हमने मुफ्त जमीन दी अखिलेश ने कहा कि एम्स के लिए हमने मुफ्त जमीन दी

गोरखपुर के लिए ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की स्थापना के क्रेडिट के लिए सीएम अखिलेश यादव ने भी दावेदारी कर दी है. हालांकि उन्होंने कहा है कि यह जनता को तय करना है.

पूर्वांचल में बड़ा मुद्दा है एम्स
पूर्वांचल में एम्स कितना बड़ा मुद्दा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोरखपुर में एम्स के क्रेडिट के लिए अखिलेश भी कूद गए हैं. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोरखपुर के फर्टिलाइजर ग्राउंड में एम्स की अधारशिला रख रहे थे, उसी दौरान अखिलेश मीडिया में इसके क्रेडिट की अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे.

गोरखपुर में सपा सरकार ने दी मुफ्त जमीन
अखिलेश ने कहा कि उनकी सरकार ने एम्स के लिए मुफ्त में जमीन मुहैया कराई है. सभी जानते हैं कि गोरखपुर में जमीन कितनी महंगी है और यह मिलना कितना मुश्किल है. ऐसे में जनता तय करे कि एम्स लाने में किसका योगदान है.

इंसेफेलाइटिस से हजारों बच्चों की मौत के बाद मिला एम्स
यूपी में चुनावी साल है और एम्स पूर्वांचल के लिए एक भावनात्मक मुद्दा है. क्योंकि यहां पिछले एक दशक में 20 हजार से ज्यादा मासूम बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस से हो चुकी है. हर साल इनके मरने का सिलसिला भी जारी है. ऐसे में एम्स के क्रेडिट की होड़ लाजमी है.

सपा ने शुरू की बीजेपी से क्रेडिट की होड़
पीएम मोदी ने एम्स का शिलान्यास कर मुद्दे की होड़ तो जीत ली. लोगों अपने इस तोहफे का भी खूब एहसास भी कराया, लेकिन समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को अकेले बीजेपी के खाते में नहीं जाने देना चाहती. इसलिए अखिलेश यादव ने अपनी दावेदारी जताने में तनिक भी देर नहीं की.

पीएम मोदी ने एम्स का क्रेडिट योगी आदित्नाथ को दिया
हालांकि पीएम मोदी ने एम्स को लाने का पूरा क्रेडिट गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को दिया और कहा कि आपने जो सांसद भेजे हैं वो आपके हक के लिए हमसे भी लोहा लेते रहते हैं.

जनता को क्रेडिट की होड़ से मतलब नहीं
बहरहाल क्रेडिट की इस लड़ाई से जनता को कोई मतलब नहीं. क्योंकि उसे तो बस एम्स चाहिए था. पूर्वी यूपी और बिहार के लोगों की ये मांग सालों से की जा रही थी. हां ये जरूर तय है कि चुनावी साल में तमाम दल इसे लाने की अपनी कोशिशों का ढिंढोरा पीटने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

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