scorecardresearch
 

संतों की बैठक में गूंजा राम मंदिर जमीन विवाद, कहा- जिनको दी जिम्मेदारी उनकी नीयत हुई खराब

वहीं दिलीप दास ने तमाम संतों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील कर दी है. वे कहते हैं कि यह संतों का काम है. संत राम के दूत हैं. अगर हम उस जगत पिता की मर्यादा की रक्षा के लिए खड़े नहीं हुए तो ये हम लोगों का दुर्भाग्य है.

राम मंदिर का मॉडल ( फाइल फोटो) राम मंदिर का मॉडल ( फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अयोध्या जमीन विवाद से संत समाज नाराज
  • ट्रस्ट की नीयत पर उठाए गए सवाल

अयोध्या में राम मंदिर जमीन विवाद हर बीतते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है. रोज के नए खुलासे राम मंदिर ट्रस्ट पर कई तरह के सवाल भी खड़े कर रहे हैं और विपक्ष को भी हमला करने का मौके दे रहे हैं.

अब संत समाज भी इस विवाद के बढ़ जाने से नाराज है. रविवार को भागवताचार्य सदन में संतों की अहम बैठक हुई जहां पर रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी दिलीप दास ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया.

अयोध्या जमीन विवाद से संत समाज नाराज?

उनकी तरफ से सीधे राम मंदिर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की नीयत पर ही सवाल खड़े कर दिए गए. उन्होंने तल्ख अंदाज में कहा- जिस राम के साथ यह विश्वासघात कर रहे हैं वह राजाराम नहीं है, वो योद्धा राम नहीं है. ये तो बालक राम है. अबोध राम है, जो बोल नहीं सकता. लेकिन जिसको बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी मिली उसकी ही जन्मभूमि पर नीयत खराब हो गई. ऐसे में ये लोग बच्चे के भविष्य के साथ क्या कर सकते हैं? इसका निर्णय आप स्वयं करें.

वे आगे कहते हैं- सीएम योगी प्रधानमंत्री मोदी व राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट से मांग करते हैं कि अयोध्या की महिमा और गरिमा के विपरीत कार्य हो रहा है, इसमें जो दलाल लगे हुए हैं, जो भ्रष्टाचार हो रहा है, इसकी उच्चस्तरीय जांच हो. इन पर कार्रवाई हो. जांच में अगर दोषी मिले तो दोषियों पर कार्रवाई हो. 

वहीं दिलीप दास ने तमाम संतों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील कर दी है. वे कहते हैं कि यह संतों का काम है. संत राम के दूत हैं.  अगर हम उस जगत पिता की मर्यादा की रक्षा के लिए खड़े नहीं हुए तो ये हम लोगों का दुर्भाग्य है. जानकारी के लिए बता दें कि इस बैठक को अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञान दास की अध्यक्षता में किया गया था. बैठक के दौरान वैसे तो कई मुद्दों पर बहस हुई, लेकिन सबसे ज्यादा जोर अयोध्या विवाद पर रहा.

चुनाव से पहले विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा

अब इस मुद्दे का यूं सुर्खियों में आना हैरान नहीं करता है. यूपी चुनाव से पहले पूरे विपक्ष ने इसे बीजेपी के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा मान लिया है. आरोप लगाया जा रहा है कि आस्था के नाम लोगों के साथ घोटाला हो रहा है. अभी के लिए बीजेपी जरूर खुद को इस विवाद से दूर रख रही है और ट्रस्ट पर भी सवाल खड़े नहीं कर रही है, लेकिन लगातार हो रहे नए खुलासे सरकार को भी मुसीबत में डालने का काम कर रहे हैं.
 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें
ऐप में खोलें×