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राम मंदिर: 1992 से जो पत्थर तराशे जा रहे थे, अब उनके इस्तेमाल का समय आ गया

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि कार्यशाला में पत्थर तराशने का कार्य 1992 से चल रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 जून को मंदिर के गर्भगृह की आधारशिला रखेंगे. उसके बाद लंबे समय से तराशे जा रहे पत्थरों का उपयोग शुरू हो जाएगा.

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तराशे जा रहे पत्थर तराशे जा रहे पत्थर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 1 जून को गर्भगृह की रखी जाएगी आधारशीला
  • अभी 20 कारीगर कर रहे हैं पत्थरों पर नक्काशी

साल 1992 से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए जो पत्थर तराशे जा रहे थे, अब उनके इस्तेमाल का समय आ गया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 जून को मंदिर के गर्भगृह की आधारशिला रखेंगे. उसके बाद लंबे समय से तराशे जा रहे पत्थरों का उपयोग शुरू हो जाएगा. इसके लिए राजस्थान और अयोध्या में पत्थरों पर नक्काशी का काम तेज हो गया है.

पहली बार इसके लिए राजस्थान के साथ यूपी के कारीगरों को भी लगाया गया है. वहीं श्री रामजन्मभूमि परिसर में तीन दिवसीय यज्ञ का शुभारम्भ भी हो चुका है. 29 मई को शुभारम्भ होने वाले सर्वदेव अनुष्ठान का समापन राम मंदिर की आधारशिला रखने के बाद 1 जून को होगा. इसमें अलग-अलग प्रान्तों के विद्वानों और जजमानों को आमंत्रित किया गया है.

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि कार्यशाला में पत्थर तराशने का कार्य 1992 से चल रहा है. अभी तक मंदिर निर्माण के लिए पिलर्स पर नक्काशी का कार्य लगभग पूरा हो गया है. छत के पत्थरों को तराशने का कार्य भी काफी हद तक हो चुका है. अब पिलर्स को आपस में जोड़ने के लिए बीम के पत्थरों पर नक्काशी का कार्य रामकारसेवक पुरम में शुरू हो गया है.

इस स्थान पर पहली बार पत्थर तराशने के लिए अस्थाई कार्यशाला का निर्माण किया गया, जिसमें अभी 15 कारीगर काम कर रहे हैं, लेकिन शीघ्र ही इनकी संख्या 50 होने वाली है. ऐसी ही 3 कार्यशाला राजस्थान में भी स्थापित की गयी है. जहां से पत्थरों को तराशने के बाद अयोध्या लाया जा रहा है.

हालांकि राम मंदिर के लिए जितने पत्थरों की आवश्यकता थी, उसका 70 फीसदी पत्थर तराश लिए गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर के पुराने मॉडल में विस्तार किया गया. इसके बाद तराशे गए पत्थरों की आवश्यकता बढ़ गयी, जिसकी पूर्ति के लिए तेजी से कार्य चल रहा है. 

यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में सीमेंट और सरिया आदि का प्रयोग नहीं होगा. यह मंदिर पुरातन पद्धति के आधार पर निर्माण किया जाएगा, जिसमें एक पत्थर की शिला के खांचे के बीच दूसरी शिला को फिट कर जोड़ा जाएगा. खांचे को कसने के लिए चांदी की पत्तियों का प्रयोग किया जाएगा.

मौके पर मौजूद ठेकेदार जोगेंद्र ने बताया कि अभी कुल 15 कारीगर है, अभी और कारीगर आएंगे, मंदिर की जो बीम पिलर के ऊपर आएगी, इसके अंदर बहुत बारीक नक्काशी है, भगवान के मंदिर में बहुत बढ़िया तरीके से अच्छी लगेगी, 10 से 20 कारीगर और आने वाले हैं, कुल 50 से 60 कारीगर हो जाएंगे, यह काम ठेकेदारी पर है, जैसे वह बोलेंगे हम बुला लेंगे.

 

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