हैदराबाद के कुकटपल्ली इलाके की कुछ नामी ज्वेलरी दुकानों में पिछले कुछ हफ्तों से जो कुछ हुआ, वो हैरान करने वाला था. दिखता तो सब सामान्य था. रोज की तरह ग्राहक आ रहे थे, गहने देख रहे थे, पसंद कर रहे थे और लौट जा रहे थे. लेकिन इस सामान्य दिनचर्या के पीछे एक ऐसा खेल चल रहा था, जिसका किसी को अंदाजा तक नहीं था.
यह कहानी है एक ऐसे शातिर दिमाग की, जो बिना शोर किए, बिना ताला तोड़े, बिना किसी हथियार के- सिर्फ अपनी चालाकी से लाखों का सोना गायब कर रहा था.
वह युवक हमेशा की तरह सलीके से कपड़े पहनकर ज्वेलरी शोरूम में एंट्री करता था. उसके हाव-भाव इतने सामान्य होते थे कि कोई भी उसे एक आम ग्राहक ही समझता. वह बड़े आराम से कर्मचारियों से बात करता, नई-नई डिजाइन की अंगूठियां दिखाने को कहता और हर अंगूठी को बड़े ध्यान से देखने का नाटक करता.
कभी वह अंगूठी को उंगली में पहनकर साइज चेक करता, तो कभी रोशनी में घुमाकर उसकी चमक पर कमेंट करता. दुकान के कर्मचारी भी उसे एक गंभीर ग्राहक समझकर पूरा ध्यान देते. लेकिन असली खेल तो उसी समय शुरू होता था.

जैसे ही कर्मचारी का ध्यान थोड़ा सा भटकता, वह युवक बड़ी सफाई से असली सोने की अंगूठी को अपने पास रखी नकली अंगूठी से बदल देता. यह सब इतना तेजी और सटीक तरीके से होता कि पास खड़ा व्यक्ति भी कुछ समझ नहीं पाता.
कुछ ही सेकंड में असली सोना गायब हो जाता और उसकी जगह नकली अंगूठी रख दी जाती. इसके बाद वह बिना किसी खरीदारी के, या कभी-कभी बहाना बनाकर, आराम से दुकान से निकल जाता.
यह सिलसिला एक दिन का नहीं था. जनवरी और फरवरी के दौरान उसने कुकटपल्ली के कई नामी ज्वेलरी शोरूम्स को इसी तरह निशाना बनाया. सीएमआर शॉपिंग मॉल और मलाबार गोल्ड जैसे प्रतिष्ठित आउटलेट्स भी उसकी चालाकी का शिकार बने.
शुरुआत में किसी को इस धोखाधड़ी का एहसास नहीं हुआ. लेकिन जब दुकानों में स्टॉक की जांच शुरू हुई, तो गड़बड़ी सामने आने लगी. कुछ अंगूठियां असली नहीं थीं.
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दुकानदारों ने तुरंत सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया. फुटेज में एक चेहरा बार-बार सामने आया- वही युवक, जो हर बार अलग-अलग दुकानों में पहुंचता था और हर बार कुछ न कुछ गड़बड़ छोड़ जाता था.
पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई. सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उस शातिर तक पहुंच बनाई, जिसकी पहचान मेरुगु सागर के रूप में हुई.
आरोपी नामी ज्वेलरी शोरूम्स को बनाता था निशाना
गिरफ्तारी के बाद जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने अपने पूरे तरीके का खुलासा कर दिया. उसने बताया कि वह जानबूझकर भीड़भाड़ वाले और नामी ज्वेलरी शोरूम्स को चुनता था, ताकि वहां पर उसकी गतिविधियों पर ज्यादा शक न हो. उसकी योजना सोची-समझी होती थी. पहले भरोसा जीतना, फिर मौका देखकर अंगूठी बदलना और बिना किसी हड़बड़ी के वहां से निकल जाना.
अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या उसने अन्य इलाकों या शहरों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है. उसके आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है. इस घटना के बाद पुलिस ने ज्वेलरी दुकानदारों को खास सतर्क रहने और ग्राहकों की गतिविधियों पर नजर रखने की सलाह दी है.