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उत्तर प्रदेश के मंत्री राजा भैया का इस्तीफा

उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने सोमवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. राजा भैया के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज है. उन पर प्रतापगढ़ में डिप्टी एसपी जिया उल हक की हत्या की साजिश रचने का आरोप है.

उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने सोमवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. राजा भैया के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज है. उन पर प्रतापगढ़ में डिप्टी एसपी जिया उल हक की हत्या की साजिश रचने का आरोप है.

सोमवार सुबह राजा भैया ने सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ बातचीत करके इस्तीफा देने का निर्णय लिया. राजा भैया का इस्तीफा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंजूर भी कर लिया है. बदतर कानून व्यवस्था के कारण मायावती ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी. ऐसे में अखिलेश यादव सरकार काफी दबाव में थी.

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राजा भैया के अलावा उनके चार अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी मामला दर्ज है. इस तरह के कयास थे कि पिछले दो दिनों में उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में हिंसा, हत्या और पुलिस बल पर हमलों की घटनाओं से अखिलेश यादव सरकार के लिए विधानसभा में आने वाले दिन काफी मुश्किल भरे हो सकता हैं. अब कानून व्यवस्था के मुद्दे पर आक्रामक विपक्ष विधानसभा में अखिलेश यादव सरकार को घेरेगा.

क्या है मामला
प्रतापगढ़ जिले में बलीपुर गांव में शनिवार शाम ग्राम प्रधान और उनके भाई की हत्या की गई थी. इसके बाद भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया था. इस हमले में डीएसपी की मौत हो गई. आठ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. पुलिस ने राजा भैया के खिलाफ केस जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की शिकायत के बाद दर्ज किया.

आजतक के पास शिकायत की वो कॉपी है, जिसे जियाउल हक की पत्नी ने पुलिस के सामने दी है. इस चिट्ठी में साफ साफ लिखा है कि डिप्टी एसपी जियाउलहक की हत्या राजा भैया के आदमियों ने करवाई है. इतना ही नहीं चिट्ठी में ये भी लिखा गया है कि हत्या से पहले जिया उलहक के साथ मारपीट की गई, और बाद में उन्हें तमंचे से गोली मार दी गई. मृतक डिप्टी एसपी की पत्नी के मुताबिक पिछले कई दिनों से जियाउल हक को धमकिया मिल रही थी.

कौन हैं राजा भैया?
बाहुबली नेता राजा भैया के नाम से पुकारे जाने वाले कुंडा से लगातार पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं. वे कुंडा के राज परिवार से आते हैं. अकसर विवादों में रहने वाले राजा भैया सबसे पहले 1993 में कुंडा से निर्दलीय विधायक चुने गए थे. साल 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावाती ने राजा भैया को जेल में डाल दिया था. मायावती सरकार ने राजा भैया पर आतंकवाद निरोधक कानून यानी पोटा भी लगा दिया था.

लेकिन एक साल बाद साल 2003 में यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार आते ही राजा भैया पर से पोटा हटा लिया गया. राजा भैया जेल से बाहर आए और साल 2005 में मुलायम सरकार में खाद्य मंत्री बने. पिछले साल जब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तो राजा भैया को जेल मंत्री के साथ खाद्य मंत्री भी बना दिया गया. इसी साल फरवरी में मंत्रिमंडल फेरबदल में राजा भैया से जेल मंत्रालय ले लिया गया पर शेष मंत्रालय उनके पास अब भी हैं.

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