यूनेस्को की ओर से भारत के कुंभ मेले को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता देने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने खुशी जाहिर करते हुए इसे भारत के लिए गर्व का विषय बताया है.
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘यह भारत के लिये बहुत खुशी और गर्व का विषय है.’ बता दें कि यूनेस्को ने भारत के कुंभ मेले को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है जो इस आध्यात्मिक महोत्सव की बड़ी स्वीकार्यता है. कुंभ मेले को दुनिया का सबसे बड़ा महोत्सव माना जाता है, जहां लाखों लोग पवित्र नदियों के किनारे स्नान के लिए दुनिया भर से जमा होते हैं.
A matter of immense joy and pride for India. https://t.co/eKBPUh2fMj
— Narendra Modi (@narendramodi) December 8, 2017
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी शुक्रवार को ट्वीट करते हुए इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की थी. उन्होंने लिखा, 'यह बताते हुए खुशी हो रही है कि यूनेस्को की ओर से भारत के कुंभ मेले को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी गई है, बीते दो साल में यह दूसरा मौका है, इससे पहले 2016 में योग की मान्यता दी गई थी'.
Kumbh Mela - I am happy to inform that Kumbh Mela has been inscribed as the Intangible Cultural Heritage of humanity by UNESCO. This is the second such inscription in the last two years. Yoga was inscribed in 2016. #KumbhMela
— Sushma Swaraj (@SushmaSwaraj) December 8, 2017
कुंभ मेले को यह मान्यता यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण संबंधी अंतर सरकारी समिति ने प्रदान की है. कुंभ मेले को ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची’ में शामिल करने का निर्णय दक्षिण कोरिया के जेजू में हुए अपने 12वें सत्र में लिया गया.
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण संबंधी अंतर सरकारी समिति की बैठक 4 से 9 दिसंबर के बीच हो रही है. योग और नवरोज के बाद पिछले करीब दो वर्षो में इस प्रकार की मान्यता प्राप्त करने वाला कुंभ मेला तीसरी धरोहर है. कुंभ मेला को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान करने की सिफारिश करते हुए विशेषज्ञ समिति ने कहा था कि यह पृथ्वी पर तीर्थयात्रियों का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण जमावड़ा है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि समिति के अनुसार यह महोत्सव व्यापक और शांतिपूर्ण है और इसका आयोजन भारत के इलाहाबाद, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में किया जाता है. इस दौरान भारत में पवित्र नदी के किनारे पूजा अर्चना की जाती है. यह धार्मिक महोत्सव सहिष्णुता और समावेशी प्रकृति को प्रदर्शित करता है और इसमें बिना किसी भेदभाव के लोग हिस्सा लेते हैं.