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‘बैटल ऑफ रिजांग ला’ के शहीदों को कृतज्ञ राष्ट्र ने याद किया

नवंबर 1962 में ‘चार्ली’ कंपनी 13 कुमाऊं के सूरमाओं ने मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में ‘आखिरी जवान, आखिरी गोली’ तक शत्रु का सामना करते हुए बहादुरी की मिसाल कायम की.

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जांबाज नायकों को याद किया
जांबाज नायकों को याद किया

  • 57 साल पहले मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में लड़ी थी बेमिसाल लड़ाई
  • जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी

कृतज्ञ राष्ट्र ने पूर्वी लद्दाख में ‘बैटल ऑफ रेजांग ला’ के जांबाज नायकों को मंगलवार को याद किया. भारतीय सेना के इतिहास में अदम्य साहस से लड़ी गई लड़ाइयों में से एक माना जाता है. नवंबर 1962 में ‘चार्ली’ कंपनी 13 कुमाऊं के सूरमाओं ने मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में ‘आखिरी जवान, आखिरी गोली’ तक शत्रु का सामना करते हुए बहादुरी की मिसाल कायम की.

दमखम और बलिदान की ये ऐसी युद्ध गाथा थी, जिसमें हर जवान ने सर्वोच्च बलिदान देकर खुद को भारत माता का सच्चा सपूत साबित किया. भारतीय सेना का ये वो महान अध्याय है जो भारतीय सैनिकों की भावी पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा. युद्ध नायकों की स्मृति और सम्मान की महान परंपरा को निभाते हुए ‘फायर एंड फ्युरी’ कोर की चुशुल बिग्रेड ने ‘बैटल ऑफ रिजांग ला’ के महान नायकों को याद किया.

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‘फायर एंड फ्युरी’ कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने रिजांग ला के शहीदों को श्रद्धांजलि दी. वो उस क्षेत्र में भी गए जहां 57 साल पहले अद्भुत जीवट वाली लड़ाई लड़ी गई थी. इस अवसर पर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भूतपूर्व सैनिकों और नागरिक हस्तियों ने भी शहीदों का नमन किया.

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