देश की सत्ता पर काबिज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने अब तक पांच झटके दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पांच फैसलों ने मोदी सरकार के अरमानों पर पानी फेर दिया, क्योंकि सरकार इन मामलों को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर पैरवी करने में लगी हुई थी.
कॉलेजियम व्यवस्था कायम
मोदी सराकर ने अपना एक साल का कार्यकाल को पूरा ही किया था और जश्न में डूबी थी, उसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहला झटका दिया था. केंद्र में मोदी सरकार ने सत्ता संभालते ही जजों की नियुक्ति करने वाली कॉलेजियम व्यवस्था को खत्म करने के लिए 2014 में संविधान संशोधन किया. इसकी जगह नेशनल ज्यूडीशियल अपॉइंटमेंट कमीशन एक्ट (एनजेएसी एक्ट) के तहत जजों की नियुक्ति करना चाहती थी.
सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबी बहस के बाद अक्टूबर, 2015 में सरकार की दलील ख़ारिज करते हुए एनजेएसी एक्ट को असंवैधानिक करार दे दिया. इससे फैसले से पुरानी जजों द्वारा जजों की नियुक्ति की कॉलेजियम व्यवस्था को फिर से लागू कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला मोदी सरकार के लिए एख बड़ा झटका था.
उत्तराखंड की बची सरकार
मोदी सरकार को दूसरा झटका उत्तराखंड में राष्ट्रपित शासन लगाना मंहगा पड़ा. उत्तराखंड में कई कांग्रेसी विधायक बीजेपी का दामन थाम लिए थे, जिससे मोदी सरकार ने हरीश रावत के नेतृत्व वाली सरकार को अल्पमत की सरकार करार देते हुए राष्ट्रपति शासन लगा दिया. इस फैसले का मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट में बचाव नहीं कर पाई. इसकी वजह से मई, 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटाते हुए हरीश रावत की सरकार फिर से बहाल कर दिया.
अरुणाचल मामले में झटका
मोदी सरकार को तीसरा झटका अरुणाचल प्रदेश में लगा. अरुणाचल प्रदेश में राजनीतिक गतिरोध का हवाला देते हुए मोदी सरकार ने 24 जनवरी 2016 को राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी थी. ये बात कांग्रेस को नगावार गुजरी. कांग्रेस ने मोदी सरकार के इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2016 में अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने मोदी सरकार के फैसले को पलट दिया.
पशुओं के खरीद बिक्री पर रोक नहीं
मोदी सरकार ने पशुओं की खरीद बिक्री पर पाबंदी लगाया. सरकार के इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने रोक लगा दिया. इसके बाद अगस्त के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने भी मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को देश बर में लागू कर दिया. मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट में काटने के लिए पशुओं की खरीद बिक्री पर बैन के फैसला का मोदी सरकार बचाव नहीं कर पाई थी.
प्राइवेसी मौलिक अधिकार
प्राइवेसी के अधिकार पर मोदी सरकार को गुरुवार को बड़ा झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार की सारी दलीलों के ठुकराते हुए प्राइवेसी के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा माना है. जबकि केंद्र सरकार की ओर से एटॉर्नी जनरल ने कहा संविधान में निजता का अधिकार न तो मौलिक अधिकार है और न ही कोई सामान्य अधिकार. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका है