सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम, वीवीपैट और ईवीएम ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर (ईटीएस) की प्रमाणिकता की जनहित याचिका पर चुनाव आयोग से दो हफ्ते में जवाब मांगा है. मुंबई के वकील सुनील अह्या ने यह जनहित याचिका दाखिल की है. अपनी याचिका में सुनील अह्या ने सुप्रीम कोर्ट से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के खिलाफ शिकायत झूठी निकलने पर छह महीने की जेल का कानूनी प्रावधान करने की भी मांग की है.
Supreme Court grants two weeks time to the Election Commission, on the PIL filed by Mumbai based advocate Sunil Ahya questioning the authenticity of the source codes of EVM, VVPAT & EVM tracking software (ETS) which may change the election results. pic.twitter.com/GK4eNAvQIg
— ANI (@ANI) July 2, 2019
चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल पर कई पार्टियां सवाल उठा चुकी हैं. चुनाव नतीजों के समय केंद्र की सत्ता में लौटने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को लेकर ट्विटर पर कुछ लोगों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर तंज कसा था. ट्विटर यूजर्स ने लिखा कि ईवीएम का मतलब है 'एवरीवन वोटेड मोदी' (सभी ने मोदी को वोट दिया).
एक व्यक्ति ने ट्वीट किया, "ईवीएम : एवरीवन वोटेड मोदी फॉर सेंटर एंड वाईएस जगन इन आंध्र प्रदेश (सबने केंद्र के लिए मोदी को वोट दिया और आंध्र प्रदेश में वाईएस जगन को."
वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव के लिए बैलेट पेपर प्रणाली को वापस लाने की मांग रखी है. उनका कहना है कि उनकी पार्टी इस मांग को लेकर 21 जुलाई को शहीद दिवस रैली के साथ एक आंदोलन शुरू करेगी. बीजेपी पर 2019 लोकसभा चुनाव में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, "बैलेट पेपर ही देश में लोकतंत्र स्थापित करने का एकमात्र उपाय है."
बनर्जी ने कोलकाता की एक जनसभा में कहा था कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ किया गया. चुनाव के दौरान कई ईवीएम मशीनों के खराब होने के बाद, उसके स्थान पर नई ईवीएम मशीनों को बिना मॉक टेस्ट के लाया गया. कौन जानता है कि वे मशीनें प्री-प्रोग्राम्ड थीं या नहीं? क्या किसी ने चेक किया था कि ये मशीनें ओवरलोडेड हैं या नहीं?"