आईआईटी समिति ने स्नातक पाठ्यक्रम में ट्यूशन फीस को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 90 हजार रुपये करने की सिफारिश की है. इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए अब 80 फीसदी महंगा हो जाएगा आईआईटी में पढ़ना.
सूत्रों ने बताया कि आईआईटी परिषद की स्थायी समिति ने हालांकि अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग जैसे समाज के कमजोर वर्ग के छात्रों पर बढ़ी फीस का भार नहीं डालने का निर्णय किया है. परिषद की बैठक मुम्बई में हुई थी.
उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के बारे में निर्णय करने वाली यह शीर्ष संस्था 7 जनवरी को अपनी बैठक में इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय करेगी.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अधिकार सम्पन्न निकाय काकोदकर समिति की सिफारिशों पर अभी भी विचार कर रहा है. समिति ने अपनी सिफारिशों में पिछले वर्ष फीस को वर्तमान 50 हजार रुपये प्रति वर्ष से बढ़ाकर 2 से 2.50 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी.
कार्यबल के विचार विमर्श की प्रक्रिया जारी रखने के बीच सूत्रों ने कहा कि प्रति वर्ष फीस में 40 हजार रुपये की वृद्धि करना अंतरिम उपाय होगा.
आईआईटी परिषद की ओर से गठित काकोदकर समिति ने ट्यूशन फीस में चार गुना वृद्धि करने का सुझाव दिया था ताकि आईआईई वित्तीय स्वायत्तता हासिल कर सके.
आईआईटी परिषद ने इन सिफारिशों पर 2013 से सिद्धांत रूप से अमल करने को मंजूरी प्रदान की थी.