सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मंगलवार को दिए अपने बयान पर सफाई दी है. ईरानी ने कहा है कि पारसी से शादी होने बाद भी उन्हें भी मुंबई के फायर टेंपल में जाने की इजाजत नहीं मिलती, लेकिन इस फैसले का वह सम्मान करती हैं.
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विवादों के बीच केंद्रीय मंत्री ईरानी ने मंगलवार को कहा था कि पीरियड्स के दौरान महिलाएं जब खून से सना पैड लेकर दोस्त के घर नहीं जातीं तो भगवान के घर कैसे जा सकती हैं. ईरानी का यह बयान आने के बाद काफी विवाद हुआ जिसपर उन्होंने अपनी सफाई पेश की. ईरानी ने ट्वीट कर लिखा कि ये फेक न्यूज है और वो जल्द ही इसका वीडियो पोस्ट करेंगी.
Sharing link of my interaction at Young Thinkers’ Conference. https://t.co/cdGr8u8DcE
— Smriti Z Irani (@smritiirani) October 23, 2018
कुछ ही देर बाद स्मृति ईरानी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक नया वीडियो डाला. स्मृति ईरानी का दावा है कि इस वीडियो में पूरा बयान है. वीडियो के मुताबिक स्मृति अपने एक अनुभव को साझा कर रही थीं. इस वीडियो में वह बता रही हैं कि कैसे एक फायर टेंपल में धार्मिक रीति-रिवाज की वजह उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया गया था. उन्होंने बताया कि इस रिवाज की वजह से उन्हें मुंबई के अंधेरी के फायर टेंपल के बाहर उन्हें खड़ा होना पड़ा था.
Fake news ...... calling you out on it. Will post my video soon. https://t.co/ZZzJ26KBXa
— Smriti Z Irani (@smritiirani) October 23, 2018
ईरानी ने कहा, 'दो पारसी बच्चों की मां होने के नाते मैंने पारसी समुदाय की भावनाओं का खयाल किया और मंदिर में प्रवेश के लिए कोर्ट कचहरी में नहीं गई. ठीक इसी तरह रजस्वला पारसी या गैर-पारसी महिलाएं भी मंदिर नहीं जातीं, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो. ' ईरानी ने कहा कि मेरे पूर्व के बयानों के यह तथ्य हैं और बाकी सब दुष्प्रचार है.
गौरतलब है कि सप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 से 50 साल (रजस्वला आयु वर्ग) आयु की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध हटाए जाने के बाद सबरीमाला मंदिर के कपाट सभी महिलाओं के लिए खोल दिए गए थे. जिसे सोमवार रात बंद कर दिया गया. हालांकि, मंदिर के गर्भगृह तक रजस्वला महिलाओं को प्रवेश नहीं कराया जा सका. सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलने के दिन से कई हिंदुवादी संगठन परंपरा पर हमला बता कर प्रदर्शन करते रहे. इस दौरान 10-50 आयुवर्ग की महिलाओं ने मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने का प्रयास भी किया लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इन्हें रोक दिया. इस दौरान हिंसक झड़पें भी हुईं.
दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह केरल के सबरीमाला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उसके फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अब सुनवाई 13 नवंबर को करेगा.