प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना 10 लाख करोड़ का है. उन्होंने जो 100 स्मार्ट सिटी बनाने का ऐलान किया है, उन पर 150 अरब डॉलर यानी 10 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा. लागत का यह अनुमान एक रिसर्च में लगाया गया है और यह स्टडी की है रिसर्च फर्म डेलॉय ने.
कहां से आएगा इतना पैसा?
इस स्टडी में तो उम्मीद जताई गई है कि यह रकम जुटाना इतना मुश्किल भी नहीं है. इसके मुताबिक 150 अरब डॉलर में से 120 अरब डॉलर यानी साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का इंतजाम तो प्राइवेट सेक्टर के इन्वेस्टमेंट से ही हो जाएगा. बाकी रकम का इंतजाम फ्रांस , अमेरिका जैसे देशों के सहयोग से कर ही लिया जाएगा.
इंतजाम के प्रयास शुरू
मोदी सरकार ने इस रकम का इंतजाम करने के प्रयास भी शुरू कर दिए हैं. इसके लिए दो प्रोग्राम शुरू किए हैं.
चुनौतियां भी कम नहीं
डेलॉय इंडिया के वरिष्ठ निदेशक पीएन सुदर्शन ने कहा कि 'स्मार्ट सिटी के लिए इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करना चिंता का विषय तो है. लेकिन इससे भी बड़ी चुनौती स्मार्ट सिटी के प्रबंधन, सरकारी नीति-निर्माण और उसके नियमन की है.'
उम्मीदें निवेशकों से ही
डेलॉय की स्टडी कहती है कि 2016 में सर्विस प्रोवाइडर और ओवर द टॉप कंटेंट प्रोवाइडर शहरों के हिसाब से वाई-फाई पर भारी निवेश करेंगे. 2016 में रिलायंस, भारती और वोडफोन भी कई शहरों में वाई-फाई सर्विस देना शुरू कर सकते हैं. गूगल और फेसबुक भी ग्रामीण इलाकों में वाई-फाई शुरू करने की योजना पर काम कर रही है.
ये 20 शहर बनेंगे सबसे पहले स्मार्ट
हाल ही में सरकार ने जिन 20 शहरों को स्मार्ट बनाने की लिस्ट जारी है उनमें भुवनेश्वर, पुणे, जयपुर, सूरत, कोच्चि, अहमदाबाद, जबलपुर, विशाखापट्टनम, सोलापुर, दावणगेरे, इंदौर, नई दिल्ली म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (NDMC), कोयंबटूर, काकीनाडा, बेलगाम, उदयपुर, गुवाहाटी, चेन्नई, लुधियाना और भोपाल शामिल हैं.