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'शिवभक्त' राहुल द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सोमवार को पर्चा भरने के मायने

अब इसको ‘नया सियासी अवतार’ कहिये या ‘भोले बाबा की भक्ति का चमत्कार’ लेकिन नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी यानि राहुल गांधी ‘बम बम बोले’ के आह्वान के साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 4  दिसंबर, सोमवार को नामांकन दाखिल करेंगे.

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सोमनाथ मंदिर में पूजा करते राहुल गांधी सोमनाथ मंदिर में पूजा करते राहुल गांधी

गुजरात का ये चुनाव आगे चल कर जिन बातों के लिए याद किया जाएगा, उनमें कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का ‘सॉफ्ट हिन्दुत्व’की लाइन को पूरे चुनाव प्रचार में कस कर पकड़े रखना भी शामिल रहेगा. राहुल चंद ही दिनों में पार्टी अध्यक्ष के नाते कांग्रेस की कमान संभालने वाले हैं. नेहरू-गांधी परिवार की ये पांचवीं पीढ़ी है जो कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालेगी. उनसे पहले नेहरू-गांधी परिवार से मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी पार्टी के इस शीर्ष पद को संभाल चुके हैं.

अब इसको ‘नया सियासी अवतार’ कहिये या ‘भोले बाबा की भक्ति का चमत्कार’ लेकिन नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी यानि राहुल गांधी ‘बम बम बोले’ के आह्वान के साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 4  दिसंबर, सोमवार को नामांकन दाखिल करेंगे. किसी ओर के अध्यक्ष पद के लिए पर्चा नहीं भरने की स्थिति में नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन 11 दिसंबर को राहुल गांधी के अध्यक्ष चुने जाने का औपचारिक एलान कर दिया जाएगा. संयोग से उस दिन भी सोमवार होगा यानि भोले बाबा का दिन. 

ढाई साल पहले केदारनाथ की यात्रा के बाद से राहुल गांधी अक्सर मंदिरों के दर्शन करते नजर आते रहे हैं. गुजरात के इस चुनाव प्रचार में राहुल जिस क्षेत्र में भी गए, वहां स्थित हर बड़े मंदिर में दर्शन करने जरूर गए. बुधवार को भी इसी कड़ी में वे ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में माथा टेकने पहुंचे. ये सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.

हालांकि कुछ टीकाकार राहुल के इस नए सियासी अवतार को एके एंटनी कमेटी की उस रिपोर्ट से भी जोड़ कर देखते हैं जिसमें चुनावी राजनीति में कांग्रेस के उतार के लिए पार्टी की प्रो-मुस्लिम छवि को कुछ हद तक जिम्मेदार ठहराया गया था.

इस बहस की फिक्र किए बिना राहुल अपने तय किए रास्ते पर बढ़ते जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी की समीक्षा बैठक में राहुल ने जोर दे कर खुद को ब्राह्मण बताया था. कुछ हफ्ते पहले राहुल ने कहा था कि इन दिनों वे गीता पढ़ रहे हैं. अभी दो हफ्ते पहले राहुल ने गुजरात के पाटन में वीर मेघमाया मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद कहा था, ‘मैं शिव का भक्त हूं, सच्चाई में विश्वास रखता हूं, बीजेपी जो भी कहे मैं अपनी सच्चाई में विश्वास रखता हूं.’ राहुल ने आस्था और मंदिरों में दर्शन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में ये बात कही थी. 2014 के लोकसभा चुनाव हों या इस साल के शुरू में यूपी विधानसभा चुनाव, राहुल काशी गए तो वहां बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद भी लिया.

कांग्रेस की चुनाव अथॉरिटी ने पार्टी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरने की तारीख 1 से 4  दिसम्बर तक तय की है. केरल में पार्टी के दिग्गज नेता और यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रमेश चेनिथल्ला की पद यात्रा का समापन एक और दो दिसंबर को है. इन दो दिनों के लिए राहुल के केरल जाने का कार्यक्रम पहले से तय था. ऐसे में राहुल के सामने नामांकन दाखिल करने के लिए 3 और 4 दिसंबर की तारीख थीं. कई करीबियों की सलाह थी कि राहुल 3 दिसंबर को ही नामांकन दाखिल कर दे, आखिरी तारीख का इंतजार ना करें. ये सलाह देने वालों का तर्क था कि 3 दिसंबर को रविवार की छुट्टी होने की वजह से मीडिया पर कवरेज भी खूब मिलेगी.

लेकिन राहुल ने खुद तय किया कि वे 4 दिसंबर, यानि आखिरी तारीख को ही नामांकन दाखिल करेंगे. दरअसल, 4 दिसंबर को सोमवार है, जो राहुल के ईष्ट भगवान शिव की आराधना का खास दिन माना जाता है. 4  दिसंबर को राहुल सबसे पहले भोले बाबा का आशीर्वाद लेंगे, फिर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन करेंगे. उसके बाद कांग्रेस मुख्यालय में जाकर नामांकन दाखिल करेंगे.  ऐसे में ‘शिवभक्त’राहुल 4 दिसंबर को जब नामांकन दाखिल करेंगे तो कांग्रेसजन ‘बम बम भोले’ का उद्घोष भी करने लगें तो हैरानी की बात नहीं होगी.

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