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शि‍वसेना के सुर में नरमी, दाल की कीमत पर किया फड़नवीस सरकार का अभिनंदन

महाराष्ट्र में निगम चुनाव के बाद से ही बीजेपी के प्रति शि‍वसेना के सुर में नरमी देखी जा रही है, वहीं अब तक महंगाई समेत तमाम मुद्दों पर सरकार की आलोचना करने वाली उसकी साथी पार्टी ने राजनीतिक शीत युद्ध की शांति की ओर एक कदम और बढ़ाया है. शि‍वसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए दाल की कीमत को स्थि‍र रखने के लिए देवेंद्र फड़नवीस सरकार का अभि‍नंदन किया है.

देवेंद्र फड़नवीस और उद्धव ठाकरे की फाइल फोटो देवेंद्र फड़नवीस और उद्धव ठाकरे की फाइल फोटो

महाराष्ट्र में निगम चुनाव के बाद से ही बीजेपी के प्रति शि‍वसेना के सुर में नरमी देखी जा रही है, वहीं अब तक महंगाई समेत तमाम मुद्दों पर सरकार की आलोचना करने वाली उसकी साथी पार्टी ने राजनीतिक शीत युद्ध की शांति की ओर एक कदम और बढ़ाया है. शि‍वसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए दाल की कीमत को स्थि‍र रखने के लिए देवेंद्र फड़नवीस सरकार का अभि‍नंदन किया है.

'सामना' के संपादकीय लेख में पार्टी ने 'सरकार का अभि‍नंदन!' शीर्षक से लिखा है कि शिवसेना के मंत्रीयों के कहने पर मुख्यमंत्री ने अरहर की दाल 120 रुपये प्रति किलो की दर से बेचने का आदेश दिया. इसके लिए सरकार का अभिनंदन. शिवसेना ने लिखा है, 'शिवसेना और बिजेपी सिर्फ गुर्रा नहीं रही है, बल्कि आम आदमी की महंगाई जैसी समस्या का समाधान भी तलाश रही है. यह विरोधीयों को ध्यान में रखना चाहिए.'

कांग्रेस शासनकाल की बकासुरी प्रवृति
पार्टी ने आगे लिखा है‍ कि दाल का भाव आसमान छूते ही विरोधीयों को मुद्दा मिल गया. इस बात से नकार नहीं सकते कि अच्छे दिन के लिए सबसे बड़ी बाधा कांग्रेस के शासनकाल की बकासुरी प्रवृति ही साबित हो रही है. शिवसेना ने लिखा है, 'कांग्रेसी इस तरह का एहसास करा रहे हैं मानो पूर्व शासनकाल में यहां रामराज्य था. महाराष्ट्र के हर घर से जैसे सोने का धुआं निकलता रहा हो, इस तरह का ताव पवार जैसे लोग प्रदर्शि‍त कर रहे हैं.'

विरोधियों पर निशान साधते हुए पार्टी ने लिखा है कि किसानों की आत्महत्याओं और उनकी चिताओं से निकल रहे धुएं से जिनकी आंखों में कभी पानी नहीं आया, दाल का भाव देखते ही उनकी आंखों के कोर गीले हो गए, यह ढोंग नहीं तो क्या है?

शि‍वसेना ने जमाखोरों पर सरकार की कार्रवाई की भी प्रशंसा की है, वहीं कांग्रेस-एनसीपी पर वार करते हुए लिखा है कि राज्य में कभी दाल महंगी हो जाती है तो कभी पानी में आग लग जाती है. ये जवालाएं भले ही आज उठ रही हों, लेकिन इन सवालों पर आग पहले से ही लगी हुई है और उसके लिए कांग्रेस के सत्ताधीश जिम्मेदार हैं.

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