भारत के रक्षा विभाग से जुड़ी सभी संस्थाओं की पुनर्रचना करने के 188 सुझावों में से 99 सुझाव योग्य मानकर उनमें से 65 सुझावों को अमल करने का आदेश हुआ है. इस पर शेकटकर कमेटी के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (पूर्व) डी बी शेकटकर ने सरकार का स्वागत किया. मार्च 2016 में गठित की गई इस कमिटी ने छह महीनों के अथक परिश्रम के बाद 188 सुझावों वाली रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को अक्टूबर 2016 में सुपुर्द की थी.
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डी बी शेकटकर ने आजतक से विशेष बातचीत में कहा कि ये स्वागत योग्य कदम है, जो पहली बारी किसी केंद्रीय सरकार ने उठाया है. शेकटकर ने कहा कि इसके पहले न जाने कितनी ही समितियां बनीं और कितने कमिटी के सुझावों को अमल किया गया, इसपर एक बड़ा प्रश्न चिह्न है. शेकटकर ने कहा कि 11 सदस्यों वाली समिति ने 400 साल के युद्ध इतिहास के अनुभव से ये रिपोर्ट बनाई है जिससे देश का रक्षा विभाग भविष्य में आने वाली युद्ध परिस्थितियों को निपटने के लिए तैयार हो सके.
उन्होंने बताया कि युद्ध को लेकर किस तरह से चुनौतियां आ रही है, इस पर समिति ने विचार किया है. करगिल का युद्ध, चीन की घुसपैठ, पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध पर भी विचार किया गया है. पाकिस्तान की बार-बार मिल रही युद्ध की चेतावनी का भारत पर क्या असर हो सकता है, पाक-चीन एकसाथ मिलकर भविष्य में क्या कर सकते हैं, ऐसे तमाम पहलुओं समिति ने विचार किया है. आंतरिक सुरक्षा, नक्सलवाद, समुद्री किनारे की सुरक्षा, इन मुद्दों को ध्यान में लिया है. तकनीक, युद्ध प्रकार, शस्त्र के प्रकार को लेकर जरूरतों पर विचार किया है. जवानों की संख्या बढ़ाने की बजाय उनकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है.