अब दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर मुसाफिरों को बैग की जांच के लिए काफी देर तक लाइन में नहीं खड़ा होना पड़ेगा. IGI एयरपोर्ट पर ऐसा सिस्टम लाया जा रहा है, जो कि बैग की जांच को जल्दी और पुख्ता तरीके से निपटाएगा. इस सिस्टम का नाम 'ऑटोमैटिक ट्रे रिट्रीवल सिस्टम' है.
कैसे काम करेगी मशीन?
इसके तहत एक्स-रे के आगे और पीछे एक कन्वेयर बेल्ट लगाई जाएगी. इस बेल्ट में खास तरह की ट्रे रखने की जगह बनी होगी, जिसके जरिए जांच हो सकेगी. इस सिस्टम की शुरुआत अगले महीने से हो सकती है.
इस सिस्टम की खासियत है कि यह सामान्य तौर पर बैग की जांच कर रहा होगा, तब अगर किसी प्रकार का संदिग्ध बैग आता है तो वह खुद ही उसे अलग कर देगा. वह बैग खुद डायवर्ट होकर दूसरी जगह चल जाएगा. अभी एयरपोर्ट पर जो सिस्टम है उसके जरिए एक घंटे में लगभग 180-200 बैगों की जांच हो पाती है, लेकिन नए सिस्टम के साथ ही यह संख्या 400 तक पहुंच सकती है. यानी कम समय में ज्यादा काम होगा.
नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे (आईजीआई) को जल्द ही एक नया टर्मिनल टी-3 मिलेगा. हवाईअड्डे विस्तार की योजना के बारे में मंगलवार को दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा लिमिटेड (डीआईएएल) द्वारा की गई. यह आईजीआई हवाईअड्डे का संचालक है. डीआईएएल के अनुसार,
टर्मिनल-1 डी और टर्मिनल-1 सी को मिलाया जाएगा, ताकि प्रतिवर्ष इसमें चार करोड़ यात्री समायोजित हो सकें.
डीआईएएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आई. प्रभाकरन राव ने कहा, "इन दोनों टर्मिनलों को मिलाकर एक टर्मिनल टी-3 का निर्माण किया जा रहा है." इस विस्तार के तहत एक नई इमारत का निर्माण होगा, जिसमें 22 एयरोब्रिज और 15 बसें होंगी.
टर्मिनल-1 डी में प्रतिवर्ष दो करोड़ यात्री समायोजित हो सकते हैं. 2016-17 में कुल 2.4 करोड़ यात्री इसमें समायोजित हुए। इस टर्मिनल को कम इंडिगो, गो एयर और स्पाइसजेट की उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. डीआईएएल ने पिछले साल नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ परामर्श कर अपनी विस्तार योजना को अंतिम रूप दिया था.