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'गतिमान एक्सप्रेस' को स्पीड पकड़ने में लगेगा और वक्त

देश में बुलेट ट्रेन की शुरुआत से पहले अब तक की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन ‘गतिमान एक्सप्रेस’ के शुरू होने में अभी और समय लग सकता है. रेलवे बोर्ड इस बहुप्रतीक्षित ट्रेन को पटरी पर दौड़ाने के लिए रेलवे संरक्षा आयुक्त की ओर से हरी झण्डी मिलने का इंतजार कर रहा है.

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देश में बुलेट ट्रेन की शुरुआत से पहले अब तक की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन ‘गतिमान एक्सप्रेस’ के शुरू होने में अभी और समय लग सकता है. रेलवे बोर्ड इस बहुप्रतीक्षित ट्रेन को पटरी पर दौड़ाने के लिए रेलवे संरक्षा आयुक्त की ओर से हरी झण्डी मिलने का इंतजार कर रहा है.

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एके मित्तल ने शनिवार को बताया कि दिल्ली और आगरा के बीच ‘गतिमान एक्सप्रेस’ को जल्द चलाने की योजना है लेकिन वे इसकी कोई निश्चित तिथि नहीं बता सकते क्योंकि अभी वे रेलवे संरक्षा आयुक्त की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

रेल उपभोक्ता संरक्षण पखवाड़े के बीच देश की विभिन्न रूटों से आने वाली ट्रेनों के जंक्शन स्टेशन मथुरा का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे मित्तल ने उम्मीद जताई कि इसकी प्रक्रिया जारी है और शीघ्र ही CRS की ओर से भी हरी झण्डी मिल जाएगी. उन्होंने लोगों की इस आशंका को भी दूर करने का प्रयास किया कि गतिमान एक्सप्रेस अपनी निर्धारित गति नहीं पकड़ सकेगी.

दिल्ली से आगरा 105 मिनट में...
मित्तल ने कहा कि गतिमान एक्सप्रेस का दिल्ली से आगरा पहुंचने का समय 105 मिनट तय किया गया है न कि 90 मिनट, जैसा कि अब तक मीडिया में प्रचारित किया जाता रहा है. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने गतिमान एक्सप्रेस के छठे ट्रायल में कथित रूप से 35 मिनट देर लगने के सवाल को यह कहकर टाल दिया यह समय तो स्वयं मीडिया ने ही निर्धारित किया था, रेलवे बोर्ड ने नहीं. मित्तल ने कहा कि वैसे भी यह गतिमान एक्सप्रेस का ट्रायल रन नहीं था, यह तो कोच की स्थिति देखी जा रही थी.

मुंबई-अहमदाबाद के बीच हाईस्पीड ट्रेन के लिए कॉरिडोर...
उन्होंने बताया कि वैसे, भारतीय रेलवे निकट भविष्य में मुंबई-अहमदाबाद के बीच हाईस्पीड ट्रेन चलाने जा रहा है जिसके लिए स्पेशल कॉरिडोर की व्यवस्था की गई है. इसकी रिपोर्ट मिलने वाली है जिसके बाद इस परियोजना पर काम आगे बढ़ेगा. स्पेशल कॉरिडोर पर चलने वाली तेज गति की ट्रेनों के रास्ते में कोई सरफेस क्रासिंग, कोई मानव रहित या मानवसहित गेट नहीं होता. ये कॉरिडोर पूरी तरह से डेडीकेटेड कॉरिडोर होते हैं. उनके रास्ते में आने वाली सड़क या तो नीचे से जाती है या ऊपर से.

-इनपुट भाषा

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